भारत-रूस ने मिलकर विकसित की ब्रह्मोस की नई मिसाइल, रफ्तार होगी Mach 4.5; 2030 तक तैनाती

नई दिल्ली
भारत और रूस की रक्षा साझेदारी एक नए मुकाम पर पहुंच गई है. दोनों के बीच हुई 800 मिलियन डॉलर की ‘घातक’ डील अब दुनिया के हथियार बाजार में हलचल मचा रही है. दोनों देशों की ज्वाइंट प्रोजेक्ट ब्रह्मोस एयरोस्पेस अब ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल को और भी घातक और तेज बनाने पर काम कर रही है. मौजूदा ब्रह्मोस की स्पीड जहां मैक-3 है, वहीं नए वेरिएंट को मैक-4.5 (Mach 4.5) की रफ्तार से उड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है. यह अपग्रेड आने वाले दशकों तक भारत को विश्व स्तर पर बढ़त दिलाने वाला साबित हो सकता है.

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बताया जा रहा है कि यह अपग्रेड मिसाइल के रैमजेट इंजन (Ramjet Engine) को और शक्तिशाली बनाकर किया जाएगा. इससे इसकी मारक क्षमता 450 से 800 किलोमीटर तक बनी रहेगी. लेकिन रफ्तार दुश्मन के किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम को मात देने वाली होगी. यही नहीं इस मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय मांग भी और अधिक बढ़ने की उम्मीद है.

रैमजेट इंजन होगा और ताकतवर
इस प्रोजेक्ट में रूस के वैज्ञानिक और भारत की DRDO (Defence Research and Development Organisation) मिलकर काम कर रहे हैं. इसका फोकस नए हाई-टेम्परेचर अलॉय और स्पेशल फ्यूल पर है, ताकि इतनी तेज गति पर भी इंजन और एयरफ्रेम सही तरह से काम करता रहे.

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मौजूदा एयरफ्रेम रहेगा कारगर
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा ब्रह्मोस का एयरफ्रेम इतना मजबूत है कि वह बिना बड़े बदलाव के मैक-4.5 की रफ्तार झेल सकता है. हालांकि इतनी रफ्तार पर तापमान और दबाव से निपटने के लिए नई सामग्री का इस्तेमाल करना होगा.

2030 तक होगा तैयार
जानकारी के मुताबिक, अपग्रेडेड ब्रह्मोस का ग्राउंड टेस्ट अगले तीन साल में शुरू हो सकता है. इसके बाद उड़ान परीक्षण और इंटीग्रेशन किया जाएगा. अनुमान है कि यह नया वेरिएंट 2030 की शुरुआत तक तैनाती के लिए तैयार हो जाएगा.

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दुश्मनों के पास नहीं होगा जवाब
मैक-4.5 स्पीड हासिल करने के बाद दुश्मन देशों के पास मिसाइल को इंटरसेप्ट करने का वक्त नहीं बचेगा. यह किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती होगी. साथ ही, इसकी हिट एनर्जी इतनी ज्यादा होगी कि यह अंडरग्राउंड बंकर, नौसैनिक जहाज और कमांड सेंटर्स तक को तबाह कर सकेगी.

फिलहाल ब्रह्मोस मिसाइल को फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देशों ने खरीदा है. लेकिन नए वेरिएंट के आने के बाद अन्य देशों से भी बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना है. यह भारत को हथियारों के वैश्विक बाजार में और मजबूत करेगा.

 

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