इस राज्य में SIR के साथ जनगणना की भी तैयारी, 2026 में होगा घर-घर सर्वे

देहरादून 
हिमालयी राज्य उत्तराखंड में वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच जनगणना की तैयारी भी शुरू हो गई। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने जनगणना के लिए 19 विभिन्न श्रेणियों में मंडल, जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति के आदेश दे दिए। मंडल स्तर पर संपूर्ण क्षेत्र के नोडल अफसर कमिश्नर होंगे। जबकि जिलों में नगर निगम क्षेत्रों को छोडकर बाकी पूरे क्षेत्र के प्रमुख जनगणना अधिकारी संबंधित जिले के डीएम होंगे।
 
सचिव-जनगणना दीपक कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार ने जनगणना का कार्यक्रम जारी करते हुए अहम दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके लिए अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू किया जा रहा है। इसके तहत अगले वर्ष अप्रैल से सितंबर के बीच किसी एक महीने में 30 दिन तक प्रदेश भर में सघन अभियान चलाकर मकानों की गणना की जाएगी। सारी प्रक्रिया आधुनिक उपकरण की मदद से केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए साफ्टवेयर पर की जाएगी। कुमार ने बताया कि उत्तराखंड समेत सभी पर्वतीय राज्यों के एक महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है।

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सचिव-जनगणना दीपक कुमार ने बताया कि जनगणना की तैयारी शुरू की जा रही है। 19 विभिन्न श्रेणियों में जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति के आदेश कर दिए गए हैं। जल्द ही अधिकारियों और कार्मिकों के प्रशिक्षण शुरू किए जाएंगे। इसकी अधिसूचना भी जारी की जा रही है।

2027 में दस दिन तक होगी जनगणना की रिहर्सल
मकानों की गणना के बाद फरवरी 2027 में किसी भी दस दिन तय कर जनगणना का अभियान चलाया जाएगा। इसमें पूर्व में मकानों की गणना का सत्यापन भी होगा। साथ ही इस अवधि में नए बने या छूटे भवनों को भी शामिल किया जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार के स्तर पर जनगणना का अंतिम कार्यक्रम जारी होने पर विधिवत रूप से राष्ट्रीय स्तर पर अभियान शुरू कर दिया जाएगा।

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चकराता-हरिद्वार में जनगणना का एक पायलट चक्र पूरा
जनगणना की विधिवत शुरूआत से पहले हर स्तर पर रिहर्सल शुरू हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार उत्तराखंड में चकराता में 22 गांवों में मकानों का सर्वेक्षण कर गणना की जा चुकी है। मैदानी जिलों में जनगणना के लिए हरिद्वार को चुना गया था। यहां हरिद्वार नगर निगम के एक वार्ड में मकानों का ब्योरा तैयार किया जा चुका है।

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नई जनगणना में सामने आएगी तस्वीर
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड की जनंसख्या महज 1.01 करोड़ आंकी गई थी। राज्य के विकास से जुड़ी योजनाएं, विभिन्न कल्याणकारी पेंशन, सब्सिड़ी आदि योजनाओं का आंकलन भी इसी के आधार पर किया जा रहा है। जबकि पिछले 14 साल में राज्य की जनसंख्या काफी ज्यादा बढ़ चुकी है। प्रमाणिक संख्या आने से राज्य में विकास योजनाओं का आकार और लक्ष्य तय करना आसान हो जाएगा। वर्ष 2011 की जनगणना के दौरान राज्य में कुल परिवार-घरों की संख्या को 19 से 20 लाख के करीब दर्ज किया गया था। हालिया कुछ वर्षों में उत्तराखंड में शहरीकरण तेजी से बढ़ा है।

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