भिंड प्रशासन की सख्ती, मनरेगा से 70% मजदूरों की छुट्टी, 84 हजार एक्टिव मजदूरों पर असर

भिंड

पंचायतों में फर्जी जॉब कार्ड बनवाकर मनरेगा की मजदूरी हड़पने वाले लोगों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। जिला पंचायत के माध्यम से सभी पंचायतों में सचिव और जीआरएस ने मजदूरों की ई-केवाइसी की जा रही है। जॉब कार्ड धारी मजदूर के आधार से उसका फेस मैच किए जा रहे हैं। दोनों का मिलान न होने पर संबंधित मजदूर को मनरेगा योजना की मजदूरी से बेदखल किया जा रहा है।
10 हजार मजदूर ही सही

बता दें जिले में कुल डेढ़ लाख मजदूरों के मनरेगा के तहत पंचायतों में जॉब कार्ड बनाए गए है। इनमें से 84 हजार एक्टिव मजदूर है। एक माह में 38 हजार मजदूरों की केवाईसी हुई है, जिसमें से महज 10 हजार मजदूर ही सही पाए गए हैं। स्थिति यह है कि जिस पंचायत में 100 मजदूर दर्ज है, वहां केवाईसी के बाद 20 से 25 कामगार ही रह गए है। 

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30 जनवरी तक मनरेगा में कार्यरत सभी मजदूरों की केवाईसी का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। ऐसे में जानकारों का मानना है कि पंचायतों में सरपंच और सचिवों द्वारा बनाए फर्जी जॉबकार्ड धारी 70 प्रतिशत तक मजदूर इस योजना से बेदखल किए जा सकते हैं।
इस तरह चल रही केवाईसी

मनरेगा के तहत पंचायतों में किए जा रहे कार्य में जॉब कार्ड धारी मजदूर कार्य करने पहुंचते हैं तो सबसे पहले उनकी ई-केवाईसी की जा रही है। सार्वजनिक कार्यक्षेत्र पर पोर्टल से आधार लिंक कर मजदूर का फोटो खींचा जा रहा है, जो आधार में लगे फोटो से मैच किया जा रहा है। इतना ही नहीं कार्यक्षेत्र पर मजदूर की सुबह-शाम नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) एप से उपस्थिति दर्ज की जा रही है। जिससे मनरेगा में अब फर्जी मजदूर कार्य नहीं कर पाएंगे। पंचायतों में भी असल मजदूर ही रह गए हैं।

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अब मजदूर के खाते में जाएगी मजदूरी

मनरेगा में प्रतिदिन की 261 रुपए मजदूरी दी जा रही है। ग्राम पंचायतों में चेक डेम, पीएम आवास योजना, पंचायत में पौधरोपण, पशु शेड निर्माण, शांतिधाम निर्माण, तालाब निर्माण, खेत तालाब, नाला निर्माण, सड़क निर्माण, स्कूल भवन का निर्माण, आंगनबाड़ी भवन का निर्माण, गोशाला, चारागाह विकास, बायोगैस निर्माण, सामुदायिक स्वच्छता, सीसी रोड निर्माण सहित आदि कार्य किए जा रहे हैं।

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इन कार्यों को मनरेगा के मजदूर करते हैं, लेकिन अभी तक पंचायत द्वारा मजदूर के दस्तावेज लगाकर सीधे खाते में पैमेंट डाल दिया जाता था। शासन की सख्ती के बाद अब मनरेगा में कार्य करने वाले मजदूर के आधार से लिंक खाते में ही मजदूरी भेजी जाएगी।

मनरेगा मजदूरों की ई-केवाईसी की जा रही है। जो कार्य करने वाले मजदूर हैं, वही रह जाएंगे। केवाइसी पूरी होते ही मजदूरों की छटनी करेंगे। – सुनील दुबे, सीईओ, जिपं भिण्ड
ये भी जानिए….

1.5 लाख मजदूर मनरेगा में दर्ज।

84 हजार पंचायतों में हैं एक्टिव ।

38 हजार की ई-केवाईसी पूरी।

28 हजार मजदूर नहीं आए।

30 जनवरी तक पूरी होगी जांच।

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