वन्यजीव अपराधियों को पकड़ने के लिए वन विभाग पुलिस से साझा करेगा जानकारी

 भोपाल
 वन्यजीव अपराध पर सख्ती के लिए विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। स्टेट टाइगर सेल की तीन साल बाद हुई बैठक में तय किया गया कि अपराधियों को पकड़ने, मामलों के त्वरित निराकरण और डिजिटल निगरानी को मजबूत करने के लिए सभी एजेंसियां मिलकर काम करेंगी।

बैठक में तय हुआ कि वन्यजीव अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विभिन्न विभाग आपस में सूचनाएं साझा करेंगे। हॉट स्पॉट की जानकारी वन विभाग पुलिस को देगा, ताकि त्वरित कार्रवाई संभव हो सके। रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी और वन विभाग के स्वान दस्ते की संयुक्त गश्त भी शुरू की जाएगी।

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न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने पर जोर

न्यायालय में लंबित मामलों की समीक्षा कर उनके शीघ्र निपटारे के प्रयास किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर आरोपितों के खिलाफ आर्म्स एक्ट, आईटी एक्ट और बीएएनएस के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। फरार वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए भी सभी एजेंसियां सहयोग करेंगी।
संयुक्त प्रशिक्षण और पुनर्गठन

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वन अमले की क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राज्य, संभागीय और जिला स्तर पर स्टेट टाइगर सेल को प्रभावी बनाने और पुनर्गठन के लिए राजस्व विभाग को भी शामिल करने का निर्णय लिया गया।
डिजिटल निगरानी और पर्यटन ठगी पर कार्रवाई

वन्यजीव से जुड़े मामलों में डिजिटल निगरानी बढ़ाने, ऑनलाइन बुकिंग से जुड़ी ठगी रोकने और टाइगर रिजर्व में पारदर्शिता लाने पर चर्चा हुई। सभी एजेंसियां अपना खुफिया तंत्र मजबूत करेंगी।
बैठक में शामिल एजेंसियां

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यह बैठक विशेष पुलिस महानिदेशक एसटीएफ पंकज श्रीवास्तव की अध्यक्षता में वन भवन में हुई। इसमें वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, साइबर पुलिस, डीआरआई, सीबीआई, कस्टम, इंटेलिजेंस ब्यूरो, एनटीसीए, स्टेट फॉरेंसिक साइंस, ईडी सहित कई एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।

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