President Gallantry Medal से सम्मानित IPS अभिषेक तिवारी ने दिया इस्तीफा, जानिए कारण

भोपाल
मध्यप्रदेश कैडर के 2013 बैच के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी ने भारतीय पुलिस सेवा की नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। गृह विभाग को सौंपे गए इस्तीफे में उन्होंने कारण व्यक्तिगत बताया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार अब वे आईटी सेक्टर में अपना भविष्य तलाशने जा रहे हैं। अपने आगामी टेक्नोलॉजी आधारित प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए उन्होंने यह बड़ा निर्णय लिया है।

इंजीनियरिंग से IPS तक का सफर

सिवनी जिले के मूल निवासी अभिषेक तिवारी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद फाइनेंस में पीजी डिप्लोमा (मैनेजमेंट) किया। वर्ष 2012 में यूपीएससी परीक्षा पास कर वे 2013 में भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए। सेवा के दौरान उन्होंने प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में बतौर एसपी जिम्मेदारी संभाली।

ये भी पढ़ें :  कटनी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 9000 नशीली गोलियों के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित

आईपीएस अभिषेक तिवारी को उनके साहसिक और प्रभावी नक्सल विरोधी अभियानों के लिए राष्ट्रपति वीरता पदक (President Gallantry Medal) से सम्मानित किया जा चुका है। बालाघाट में एसपी रहते हुए 2019 और 2020 में उन्होंने कई सफल नक्सल ऑपरेशनों को अंजाम दिया, जिससे क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर बड़ा अंकुश लगा।

ये भी पढ़ें :  डॉ अंबेडकर के सम्मान में पंच तीर्थ का विकास का निर्णय एक ऐतिहासिक कदम: मुख्यमंत्री डॉ यादव

एनटीआरओ प्रतिनियुक्ति और सागर घटना

मार्च 2024 में अभिषेक तिवारी को नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (NTRO) में प्रतिनियुक्ति मिली थी, लेकिन लोकसभा चुनाव के चलते केंद्र में कार्यभार ग्रहण नहीं हो सका। चुनाव के बाद भी उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।

इसी दौरान जुलाई–अगस्त 2024 में, जब वे सागर एसपी पद पर थे और विदेश प्रवास पर थे, तब दीवार गिरने की घटना में नौ बच्चों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद उन्हें सागर से हटाया गया और वे प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली चले गए।

ये भी पढ़ें :  MP में 48 लाख रजिस्ट्रियों पर ब्रेक, स्वामित्व योजना में पटवारियों ने साइन से किया इनकार

अब टेक्नोलॉजी की दुनिया में नई पारी

बालाघाट, रतलाम और सागर जैसे जिलों में सेवाएं दे चुके अभिषेक तिवारी अब आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। उनका यह फैसला प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और युवा अफसरों के बीच एक नई बहस को जन्म दे रहा है।

Share

Leave a Comment