मध्यप्रदेश के कारीगरों की दिल्ली हाट में सहभागिता

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना अंतर्गत प्रदर्शनी का आयोजन

भोपाल
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश के पाँच पारंपरिक कारीगर 31 जनवरी 2026 तक दिल्ली हाट, नई दिल्ली में आयोजित शिल्प एवं हस्तकला प्रदर्शनी में सहभागिता कर रहे हैं। यह सहभागिता भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा प्रायोजित है तथा राज्य नोडल विभाग हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प संचालनालय, भोपाल द्वारा समन्वित की जा रही है।

मध्यप्रदेश से चयनित ये पाँच कारीगर प्रदेश की जीवंत एवं समृद्ध शिल्प परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनके द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे उत्पादों में इंदौर के पारंपरिक चमड़े के खिलौने, सीहोर के लकड़ी के खिलौने, पारंपरिक लकड़ी की नक्काशीदार मूर्तियाँ, बेतूल की डोकरा (घंटी धातु) कला तथा चमड़े से निर्मित परिधान एवं एसेसरीज़ शामिल हैं। ये सभी शिल्प पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक दक्षता, सांस्कृतिक विरासत एवं क्षेत्रीय पहचान को प्रतिबिंबित करते हैं।

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कारीगरों का संक्षिप्त परिचय
श्री जितेंद्र, बेतूल (म.प्र.) से डोकरा (घंटी धातु) कारीगर हैं, जो पीढ़ियों से अपने परिवार के साथ इस पारंपरिक हस्त ढलाई धातु शिल्प से जुड़े हुए हैं। उनकी कृतियाँ स्थानीय संस्कृति में निहित पारंपरिक शिल्प कौशल को दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से उनके शिल्प को राष्ट्रीय पहचान एवं बेहतर विपणन अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

श्री केदारनाथ साहू, शहडोल जिले के परंपरागत लकड़ी शिल्पकार हैं। उनकी कारीगरी पारंपरिक शिल्प कौशल को आधुनिक डिज़ाइन दृष्टिकोण के साथ संयोजित करती है, जिससे आकर्षक एवं समकालीन लकड़ी की कलाकृतियाँ निर्मित होती हैं। योजना के माध्यम से उन्हें व्यापक बाजार पहुँच एवं नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

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श्री प्रकाश, पारंपरिक खिलौना निर्माता हैं, जो विशिष्ट शैली के चमड़े जैसे दिखने वाले खिलौनों का निर्माण करते हैं। ये खिलौने क्रूरता-मुक्त सामग्रियों से बनाए जाते हैं, जबकि पारंपरिक तकनीक, बारीकी एवं फिनिश को पूर्णतः संरक्षित रखा गया है। दिव्यांगता के बावजूद उनकी निरंतर साधना एवं समर्पण प्रेरणास्पद है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से उनके उत्पादों को व्यापक बाजार एवं पहचान मिल रही है।

श्री विनोद कुमार शर्मा एवं श्रीमती सविता शर्मा, सीहोर जिले के पारंपरिक लकड़ी के खिलौना निर्माता हैं। लकड़ी के खिलौने सीहोर जिले का ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) हैं। इनके द्वारा निर्मित खिलौने सरल आकृतियों, चमकीले रंगों एवं समय-परीक्षित निर्माण विधियों के माध्यम से बच्चों एवं वयस्कों दोनों कोआकर्षित करते हैं। योजना के माध्यम से इन्हें व्यापक विपणन मंच उपलब्ध हो रहे हैं।

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श्री सनी स्वामी, इंदौर के मोची कारीगर हैं, जिन्होंने पारंपरिक रूप से चमड़े के जूते बनाने से अपने कार्य की शुरुआत की। वर्तमान में वे चमड़े के परिधान एवं एसेसरीज़ जैसे जैकेट, लैपटॉप स्लीव, हैंडबैग एवं क्लच का निर्माण कर रहे हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत उन्हें एक लाख का ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उनके व्यवसाय का विस्तार संभव हुआ। योजना के विपणन सहयोग से वे नए बाजारों तक पहुँच बना रहे हैं।

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से इन कारीगरों को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन का अवसर प्राप्त हो रहा है, बल्कि प्रत्यक्ष विपणन, बाजार संपर्क एवं आजीविका सुदृढ़ीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है।

 

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