यूका का जहरीला कचरा भस्म होकर हुआ सुरक्षित, अब 900 टन राख को स्थायी रूप से दफनाया जाएगा

पीथमपुर
42 साल पहले भोपाल में पांच हजार लोगों को मौत की नींद सुलाने वाली यूनियन कार्बाइड फैक्टरी का 337 टन विषैला कचरा तो इंदौर के समीप पीथमपुर में दफन हो गया। अब उसकी बची 900 टन राख को भी हमेशा-हमेशा के लिए दफन कर दिया गया है। फैक्टरी से निकली गैस के कारण हजारों प्रभावित हुए थे। जिन गर्भवतियों की सांसों में यह गैस गई थी, उनकी संतानों पर भी इसका असर देखने को मिला था। इस त्रासदी के अवशेष राख के रूप में जिंदा थे और हाईकोर्ट के निर्देश पर राख को लैंडफिल किया गया है। यह हिस्सा आबादी क्षेत्र से आधा किलोमीटर दूर है।

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पीथमपुर में रामकी कंपनी ने अपने प्लांट में 337 टन जहरीला कचरा छह माह में जलाया। उसके बाद बची राख को जुलाई माह से कंपनी के परिसर में एक प्लेटफॉर्म पर रखा गया है। उस राख की भी विशेषज्ञों ने जांच की। राख को दफनाने के लिए एक तालाबनुमा गड्ढा खोदा गया था।

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जमीन से चार फीट ऊंचाई पर एक प्लेटफॉर्म बनाया गया है। उस पर एचडीपीई लाइनर बिछाया गया। उसमें राख के विशेष पैकेट को रखा गया है। अब उसे मिट्टी से ढक दिया जाएगा और उस पर पौधारोपण किया जाएगा। बची हुई राख में मरकरी, निकल, जिंक, कोबाल्ट, मैंगनीज सहित अन्य तत्व हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि यह राख पानी के संपर्क में नहीं आएगी और भूजल इससे प्रभावित नहीं होगा।

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सोलह साल पहले भी 30 टन से ज्यादा राख पीथमपुर में लैंडफिल की गई थी। उस कारण भस्मक के समीप से निकलने वाली नदी का पानी काला हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उस पानी का उपयोग खेतों में नहीं करते, इससे फसल खराब हो जाती है। अब उसी फैक्टरी की 900 टन राख को भी पीथमपुर में दफन किया गया है। अब इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जाएगी।

 

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