सुकमा में दो महिलाओं समेत चार माओवादी गिरफ्तार नहीं, किया आत्मसमर्पण, आठ लाख का था इनाम

सुकमा

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में शुक्रवार को दो महिलाओं समेत चार माओवादियों ने अपने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इन चारों नक्सलियों पर कुल आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की 'पूना मार्गेम (पुनर्वास से सामाजिक एकीकरण)' पहल के तहत हुआ है।

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी दक्षिण बस्तर डिवीजन की किस्ताराम एरिया कमेटी से संबंधित थे। उन्होंने बताया कि वे राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित थे। इनमें एरिया कमेटी सदस्य सोढ़ी जोगा पर पांच लाख रुपये का इनाम था, जबकि डाबर गंगा उर्फ मडकम गंगा, सोढ़ी राजे और माडवी बुधारी पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था।

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हथियार और गोला-बारूद बरामद
नक्सलियों ने आत्मसमर्पण के दौरान एक इंसास राइफल, एक सिंगल लोडिंग राइफल (एसएलआर), एक .303 राइफल और एक .315 राइफल के साथ भारी मात्रा में गोला-बारूद भी पुलिस को सौंप दिया है। यह घटना राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।

नक्सलवाद के विरुद्ध सरकारी पहल
हाल के दिनों में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। 15 जनवरी को पड़ोसी बीजापुर जिले में 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। वर्ष 2025 में राज्य में 1,500 से अधिक नक्सली मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। केंद्र सरकार ने इस साल 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लिया है। इस दिशा में राज्य सरकार की पुनर्वास और सामाजिक एकीकरण की पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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नक्सलियों का लाल आतंक मोहभंग के कारण
किस्टाराम और गोलापल्ली क्षेत्रों में नवीन सुरक्षा कैम्पों की स्थापना, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और लगातार सफल नक्सल विरोधी अभियानों के कारण माओवादियों का स्वतंत्र विचरण क्षेत्र सिमट गया है। साथ ही, सुदूर अंचलों तक विकास योजनाओं और शासकीय सुविधाओं की पहुँच से स्थानीय जनता का भरोसा शासन-प्रशासन के प्रति मजबूत हुआ है, जिससे माओवादी संगठन में तेजी से मोहभंग बढ़ा है। यह आत्मसमर्पण इसी मोहभंग का परिणाम है।
 
पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी
पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी कैडरों को छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत नियमानुसार आर्थिक सहायता, पुनर्वास और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी, ताकि वे शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जीवन जी सकें। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने शेष सक्रिय माओवादी कैडरों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर ‘पूना मारगेम’अभियान के तहत आत्मसमर्पण करें, क्योंकि यह अभियान उन्हें सुरक्षित भविष्य और समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर प्रदान करता है।

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