चाबहार फंडिंग रोकना भारी पड़ सकता है, चीन को मिलेगा सुनहरा मौका! बजट पर एक्सपर्ट की बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली
भारत ने आम बजट में चाबहार पोर्ट के लिए किसी भी तरह के बजट का प्रावधान नहीं किया है। सालों बाद ऐसा बजट आया है, जब इस परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं हुआ है। इसे लेकर विदेश एवं रणनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने एक्स पर इस संबंध में एक लंबी पोस्ट लिखकर ऐतराज जताया है। चेलानी ने लिखा है कि चाबहार बंदरगाह एकमात्र ऐसा रूट है, जिसके जरिए भारत की पहुंच बढ़ती है। वह मध्य एशिया और अफगानिस्तान जा सकता है और इसके लिए उसे पाकिस्तान जाने की जरूरत भी नहीं है। ऐसी स्थिति में इतने महत्वपूर्ण बंदरगाह के लिए फंडिंग खत्म करना या खुद को उससे दूर करना सही नहीं है।
 
वह लिखते हैं कि यह ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी थी कि वह 26 अप्रैल तक इस प्रोजेक्ट से अलग हटे या फिर पाबंदियों के लिए तैयार रहे। ब्रह्म चेलानी कहते हैं कि चाबहार की फंडिंग खत्म करने का फैसला सही नहीं है। इससे चीन को स्पेस मिलेगा और वह भारत की जगह वहां भी ले लेगा। पहले ही चीन पाकिस्तान स्थित ग्वादर पोर्ट में निवेश कर रहा है। यह उसके चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा है। ऐसी स्थिति में अब यदि भारत ने चाबहार पोर्ट से हाथ खींचे तो चीन वहां भी अपनी मौजूदगी के लिए कोशिश कर सकता है। इसके अलावा ईरान भी अमेरिका से संघर्ष में अलग-थलग पड़ रहा है और उसे भी किसी मजबूत साथी की जरूरत है।

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भारत का एग्जिट कैसे बन सकता है चीन के लिए एंट्री पॉइंट?
उसकी यह तलाश तो चीन के तौर पर पूरी हो सकती है, लेकिन भारत के लिए चाबहार से हटना लंबे समय में एक रणनीतिक चूक हो सकती है। ब्रह्म चेलानी लिखते हैं, 'भारत ने चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास के लिए 120 मिलियन डॉलर पहले ही ट्रांसफर कर दिए हैं। यह धनराशि पहले से ही मौजूद है। इसलिए शायद नए बजट आवंटन की जरूरत नहीं रही होगी, लेकिन यह भी खबरें हैं कि भारत की ओर से चाबहार के मुद्दे पर वॉशिंगटन के साथ बीच का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है।' इसके अलावा लिखते हैं कि नई दिल्ली पर अपना दबाव बढ़ाते हुए ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल सितंबर में भारत को 2018 में दी गई चाबहार संबंधी प्रतिबंध छूट को बिना किसी कारण के वापस ले लिया था।

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क्यों भारत के लिए इतना अहम रहा है चाबहार पोर्ट
दरअसल भारत के लिए चाबहार पोर्ट एक महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजना है। भारत और ईरान इस पर सालों से काम कर रहे हैं। पाकिस्तान का भू-रणनीतिक महत्व यही रहा है कि उसकी जमीन या आसमान से गुजरे बिना भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया जाना संभव नहीं रहा है। अब इस कमी को चाबहार परियोजना पूरा करती है। इसके माध्यम से भारत रूस तक जा सकता है। इसी को केंद्र में रखकर नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी NSTC पर भी काम चल रहा है। इसलिए चाबहार पोर्ट को इसकी धुरी माना जाता है। ऐसे में जब चाबहार के लिए कोई बजट आवंटित ना होने की खबर आई तो उसकी चर्चा होने लगी।

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