AIIMS भोपाल का ‘मैजिक नाइफ’: एक ही औजार से संभव होगी डेंटल सर्जरी

भोपाल

एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने दांतों की सर्जरी में इस्तेमाल होने वाला एक मल्टीपल टूल विकसित किया है, जिसे भारत सरकार से पेटेंट मिला है. यह उपकरण डेंटल इम्प्लांट और ओरल सर्जरी को आसान और कम समय में पूरा करने में मदद करेगा. 

दरअसल, दांतों के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को एक ही उपकरण से  कट लगाना, पकड़ना और इम्प्लांट करना  जैसे अलग अलग काम करने होते हैं. 

इससे निजात पाने के लिए एम्स के डॉक्टरों ने डेंटल इम्प्लांट और माइनर ओरल सर्जरी के लिए एक मल्टीपर्पज सर्जिकल टूल बनाया है. यह एक 'स्विस नाइफ' की तरह काम करता है, जिसमें सर्जरी के तमाम स्टेपस् के लिएजरूरी  कई टूल्स एक ही डिवाइस में मिलते हैं. 

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इस 'स्विस नाइफ' की 5 बड़ी विशेषताएं

  •     ऑल-इन-वन डिज़ाइन यानी सर्जरी के दौरान अलग-अलग दर्जनों औजारों की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे प्रक्रिया आसान होगी.
  •     कम उपकरणों के उपयोग से संक्रमण का खतरा कम होगा और शल्य चिकित्सा की सटीकता बढ़ेगी.
  •     प्रक्रिया कम समय में पूरी होने से मरीजों को कम असुविधा होगी और उनकी रिकवरी तेज होगी.
  •     इसका डिजाइन काफी छोटा और हल्का है, जो इसे मोबाइल क्लीनिकों और ग्रामीण स्वास्थ्य शिविरों के लिए आदर्श बनाता है.
  •     वहीं, महंगे विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होने से दंत चिकित्सा की लागत में कमी आएगी. 
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह पेटेंट न केवल एम्स भोपाल के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह 'मेक इन इंडिया' पहल को भी मजबूती प्रदान करता है. आने वाले समय में यह उपकरण सरकारी अस्पतालों, प्राइवेट क्लीनिकों और ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है.

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इस स्वदेशी उपकरण के मुख्य आविष्कारक डॉ. अंशुल राय हैं. उनके साथ डॉ. बाबूलाल, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. ज़ेनिश भट्टी और डॉ. मोनिका राय ने सह-आविष्कारकों के रूप में इस पर काम किया. टीम का उद्देश्य सर्जरी के दौरान बार-बार उपकरण बदलने की जटिलता और उससे होने वाली मानवीय त्रुटियों को कम करना था. 

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