हवा में तैरता आधा टन का चुंबक और अनलिमिटेड बिजली, न्यूक्लियर फ्यूजन ने इंसानों को दी सूरज जैसी ताकत!

नई दिल्ली

न्यूजीलैंड की एक छोटी सी कंपनी ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज ने न्यूक्लियर फ्यूजन की रेस में पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है. इस स्टार्टअप ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे अब तक नामुमकिन माना जा रहा था. कंपनी ने आधे टन के भारी-भरकम चुंबक को हवा में तैराकर प्लाज्मा को सफलतापूर्वक कंट्रोल किया है. यह दुनिया में अपनी तरह का पहला कमर्शियल प्रयोग है. न्यूक्लियर फ्यूजन को मॉडर्न फिजिक्स का सबसे बड़ा लक्ष्य माना जाता है. अगर यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है, तो इंसानों को असीमित बिजली मिल सकेगी. सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें न तो कार्बन उत्सर्जन होता है और न ही खतरनाक रेडियोएक्टिव कचरा निकलता है.

हवा में तैरते चुंबक से कैसे पैदा होगी बिजली?

  •     ओपनस्टार के फाउंडर रातु माताइरा ने इस मशीन के काम करने का तरीका समझाया है. उनकी कंपनी ‘लेविटेटेड डायपोल’ नाम की एक खास तकनीक पर काम कर रही है.
  •     इसमें एक शक्तिशाली चुंबक को मैग्नेटिक फील्ड की मदद से हवा में लटकाया जाता है. इसी तैरते हुए चुंबक के चारों ओर प्लाज्मा को रोककर रखा जाता है.
  •     अब तक पूरी इंडस्ट्री को लगता था कि ऐसी मशीन बनाना इंजीनियरिंग के हिसाब से संभव नहीं है. लेकिन न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है.
  •     उन्होंने ‘जूनियर’ नाम के प्रोटोटाइप से यह दिखा दिया कि यह तकनीक न सिर्फ काम करती है, बल्कि इसे बड़े स्तर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
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फ्यूजन और फिशन के बीच क्या अंतर है?

आजकल के परमाणु रिएक्टर ‘फिशन’ तकनीक पर चलते हैं. इसमें एटम्स को तोड़ा जाता है, जिससे एनर्जी निकलती है. लेकिन इस प्रोसेस में बहुत सारा खतरनाक कचरा भी पैदा होता है. इसके उलट ‘फ्यूजन’ की प्रक्रिया तारों और सूरज के अंदर होती है. इसमें दो एटम्स के केंद्र को आपस में जोड़ा जाता है. इस प्रोसेस से फिशन के मुकाबले कई गुना ज्यादा ऊर्जा निकलती है.

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सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इस प्रोसेस को शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ती थी. ओपनस्टार की नई खोज ने इस मुश्किल को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. अब कम ऊर्जा खर्च करके ज्यादा बिजली बनाने का रास्ता साफ हो गया है.

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क्या 2030 तक घर-घर पहुंचेगी परमाणु बिजली?

ओपनस्टार की सफलता के बाद अब अगले चरण की तैयारी शुरू हो गई है. कंपनी का अगला प्रोटोटाइप ‘ताही’ होगा, जिसकी मैग्नेटिक फील्ड मौजूदा मशीन से चार गुना ज्यादा ताकतवर होगी. न्यूजीलैंड की सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट की अहमियत को समझते हुए 3.5 करोड़ डॉलर की मदद देने का वादा किया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह हाई-एनर्जी फ्लक्स-पंप तकनीक आने वाले समय में रिसर्च की दिशा बदल देगी.

कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 के दशक तक ऐसे कमर्शियल रिएक्टर तैयार कर लिए जाएं, जो शहरों को बिजली सप्लाई कर सकें. यह सफलता कोल और गैस जैसे पुराने ईंधन पर दुनिया की निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर सकती है.

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