बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ वॉट्सएप चैट से तलाक नहीं, पत्नी पर क्रूरता के आरोप साबित करने होंगे

मुंबई

बॉम्बे हाई कोर्ट ने नासिक फैमिली कोर्ट की ओर से पति को दिया गया तलाक का फैसला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल WhatsApp या SMS संदेशों के आधार पर पत्नी पर मानसिक क्रूरता साबित नहीं की जा सकती, खासकर तब जब पत्नी को अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया गया हो।

इससे पहले, नासिक फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका मंजूर करते हुए उसे तलाक दे दिया था। कोर्ट ने पति की गवाही और पति-पत्नी के बीच हुई व्हाट्सऐप व एसएमएस बातचीत को सबूत माना था। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी उस पर पुणे में शिफ्ट होने का दबाव डालती थी, उसके परिवार का अपमान करती थी और इन संदेशों से उसे मानसिक क्रूरता का सामना करना पड़ा।

ये भी पढ़ें :  Train Cancelled : छत्तीसगढ़ से चलने वाली 34 ट्रेनें कैंसिल, 10 मार्च तक रहेंगी प्रभावित, यहां देखिए पूरी लिस्ट

 बॉम्बे हाई कोर्ट ने तलाक के एक मामले में अहर फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने नासिक फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को रद्द करते हुए कहा कि किसी भी मामले में फैसला सुनाने से पहले दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। पत्नी को अपनी सफाई देने का अवसर दिए बिना तलाक देना सही नहीं है। बता दें कि नासिक फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार करते हुए उसे तलाक दे दिया था। कोर्ट ने पति के बयान और पति-पत्नी के बीच हुए व्हाट्सऐप और एसएमएस संदेशों को मुख्य सबूत माना था।

पति ने लगाए थे यह आरोप
पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी उस पर पुणे शिफ्ट होने का दबाव बना रही थी। उसने कोर्ट में पत्नी के साथ की गई व्हाट्सऐप चैट भी साझा की थी। साथ ही उसने आरोप लगाया था कि उसके ससुराल वालों के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इससे उसे मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। नासिक फैमिली कोर्ट ने पति के हक में फैसला सुनाते हुए कहा था कि अगर पत्नी पति पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने के लिए दबाव बनाती है और ससुराल वालों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती है तो इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने पति को तलाक दे दिया था।

ये भी पढ़ें :  बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: कहीं भी नमाज अदा करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता, जानें पूरा मामला

अगर पत्नी पति पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने के लिए दबाव बनाती है और ससुराल वालों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती है तो इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है।

हाई कोर्ट ने फैसले नासिक कोर्ट के फैसल पर जताई आपत्ति
नासिक कोर्ट के इस फैसले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने असहमति जताई। हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी को इन मैसेजों के बारे में अपनी बात रखने या उन्हें चुनौती देने का कोई मौका नहीं दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल व्हाट्सऐप चैट को आधार बनाकर तलाक का फैसला नहीं दिया जा सकता। जब तक दोनों पक्षों की बात नहीं सुनी जाती ऐसा निर्णय उचित नहीं माना जाएगा। हाई कोर्ट ने मामले को फिर से नासिक फैमिली कोर्ट को भेज दिया है। अब पत्नी को भी अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

ये भी पढ़ें :  बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा- जीवनसाथी का त्महत्या करने की धमकी देना क्रूरता है, यह तलाक का वैध आधार

 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment