जनगणना 2027: भारत की पहली ‘डिजिटल जनगणना’ से नीति निर्माण को मिलेगा बढ़ावा, होगी दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना

नई दिल्ली 
भारत की जनगणना 2027 देश की पहली पूरी तरह 'डिजिटल जनगणना' होगी। इसमें मोबाइल के जरिए डेटा जुटाया जाएगा, जिससे सही और विस्तृत जानकारी मिलेगी और बेहतर नीति बनाने में मदद मिलेगी।  एक आधिकारिक फैक्ट-शीट में यह जानकारी दी गई। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस जनगणना में कई नई सुविधाएं होंगी, जैसे कि सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीएमएमएस) पोर्टल के जरिए लगभग रियल-टाइम निगरानी, खुद से जानकारी भरने का विकल्प और जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों का व्यापक उपयोग।

राजनैतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 अप्रैल 2025 को हुई अपनी बैठक में जनगणना 2027 में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लिया। इससे पहले 2011 की जनगणना तक केवल अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की ही व्यवस्थित गणना होती थी।

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इस पूरी प्रक्रिया के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है और डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत इंतजाम किए गए हैं।जनगणना 2027 को दो चरणों में किया जाएगा, ताकि पूरे देश में व्यवस्थित और व्यापक तरीके से डेटा इकट्ठा किया जा सके।
सरकार के अनुसार, सुरक्षित डेटा सेंटर और बड़े कार्यबल की मदद से यह जनगणना भरोसेमंद जानकारी देगी, जिससे लक्षित और समावेशी नीति बनाना आसान होगा।

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बयान में आगे कहा गया है कि जनगणना से जनसंख्या के रुझानों को सही तरीके से समझने में मदद मिलती है और इससे भोजन, पानी, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में बेहतर योजना बनाई जा सकती है। यह स्थानीय स्तर पर भी सटीक जानकारी देता है, ताकि सरकारी योजनाओं को सही जगह तक पहुंचाया जा सके।

स्वतंत्रता के बाद यह देश की आठवीं जनगणना होगी, जो पहले से ज्यादा अपडेट और विस्तृत जानकारी देगी। इससे बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार योजना बनाना आसान होगा।

जनगणना देश या किसी विशिष्ट क्षेत्र के सभी व्यक्तियों से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आंकड़ों के संग्रह, संकलन, विश्लेषण और प्रसार की प्रक्रिया है। जनगणना के माध्यम से एकत्रित सूचनाओं का विशाल भंडार इसे योजनाकारों, प्रशासकों, शोधकर्ताओं और अन्य डेटा उपयोगकर्ताओं के लिए आंकड़ों का सबसे समृद्ध स्रोत बनाता है। जनगणना गवर्नेंस के लिए एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में कार्य करती है, जो राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।

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यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना होगी और डिजिटल तकनीक, मजबूत डेटा सुरक्षा और आसान प्रक्रियाओं के साथ यह डेटा-आधारित नीति निर्माण को और मजबूत बनाएगी।

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