IPS अजय पाल शर्मा को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत, मतदान तक नहीं हटाए जाएंगे

 कलकत्ता 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार को दूसरे चरण का मतदान चल रहा है। इसके ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर और ऑब्जर्वर बनकर पश्चिम बंगाल गए यूपी कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा के बीच शुरू हुई तकरार की चर्चा देश भर में हो रही है। इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट से आईपीएस अजय पाल शर्मा को बड़ी राहत मिली है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 29 अप्रैल तक चुनाव ड्यूटी पर तैनात किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई आदेश जारी नहीं करेगा, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण होना है। एक वकील ने जस्टिस कृष्ण राव की कोर्ट में आईपीएस अफसर अजय पाल शर्मा को जोन में काम करने से रोकने के लिए मौखिक रूप से प्रार्थना की थी। आईपीएस अजय पाल साउथ 24 परगना जिले में राज्य विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक हैं।

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वकील का आरोप था कि अजय पाल आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं। इस पर, जस्टिस राव ने कहा कि वह 29 अप्रैल तक चुनाव ड्यूटी पर मौजूद किसी भी ऑफिसर के बारे में कोई ऑर्डर पास नहीं करेंगे। वकील ने अर्जी दी कि इस बारे में याचिका दायर करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। जब वकील ने आरोप लगाया कि अजय वोटर्स को डरा रहे हैं। इस पर जस्टिस राव ने कहा कि अगर कोई शिकायत है तो चुनाव आयोग से संपर्क करें। वकील ने दावा किया कि आयोग को बताया गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं आया है।

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मतदान से पहले छाए ‘सिंघम’ और ‘पुष्पा’
उत्तर प्रदेश के चर्चित आईपीएस अजय पाल शर्मा और टीएमसी नेतृत्व के बीच मतदान से एक दिन पहले मंगलवार को गतिरोध बढ़ गया। ‘सिंघम’ के नाम से चर्चित अफसर ने जहांगीर खान का नाम लेकर कुछ लोगों पर सख्ती दिखाई तो इसके जवाब में टीएमसी नेता ने ‘झुकेगा नहीं’ वाला पुष्पा अंदाज दिखाया।

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तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने आरोप लगाया है कि अजय पाल शर्मा पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को डरा धमका रहे हैं। जहांगीर खान ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को मतदाताओं को डराने-धमकाने नहीं देंगे। यह बंगाल है, अगर वह (शर्मा) ‘सिंघम’ हैं, तो मैं ‘पुष्पा’ हूं। फाल्टा में यूपी के पुलिस अधिकारियों की किसी भी तरह की धमकी या दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। टीएमसी उम्मीदवार ने कहा कि शर्मा पुलिस बल के साथ आए और मुझ पर तथा मेरे लोगों पर दबाव डालने की कोशिश की। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे कृत्य स्वीकार्य नहीं हैं।

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