चुनाव नतीजों ने बदला सियासी खेल, राहुल की रणनीति फेल; सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट को मिला नया सहारा

नई दिल्ली

लोकसभा में परिसीमन विधेयक पर झटका लगने के बाद केंद्र सरकार ने अब नई रणनीति के साथ वापसी की तैयारी शुरू कर दी है. हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों ने देश की राजनीति का गणित बदल दिया है और इसी बदले हुए समीकरण के बीच सरकार अपने दो बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट परिसीमन (डिलिमिटेशन) और ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ बिल को आगे बढ़ाने में जुट गई है। 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि संसद में पहले विपक्षी एकता की वजह से अटक गए परिसीमन बिल को अब नए स्वरूप में लाने की तैयारी चल रही है. गृह मंत्रालय इस संबंध में नए विधेयक पर काम कर रहा है. माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पहले जैसी नहीं रही, जिसका फायदा सरकार उठाना चाहती है। 

बदले राजनीतिक हालात के बाद नई रणनीति
दरअसल, जिस विपक्षी मोर्चे ने संसद में एकजुट होकर सरकार की राह रोकी थी, अब उसी खेमे में दरार की चर्चाएं तेज हैं. बीजेपी की नजर खास तौर पर डीएमके और टीएमसी की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों पर है. पार्टी को उम्मीद है कि कुछ क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय स्तर पर भले विपक्ष के साथ रहें, लेकिन विशेष मुद्दों पर सरकार का समर्थन कर सकते हैं। 

ये भी पढ़ें :  कांग्रेस देश के टुकड़े करने वालों के साथ, भाजपा उनका सफाया करती है : अनुराग ठाकुर

सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हालिया विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. इन चुनावों में विपक्षी दलों को लगे झटकों के बाद बीजेपी अब क्षेत्रीय दलों के साथ नए सिरे से बातचीत की कोशिश कर रही है. पार्टी का मानना है कि संसद में कुछ मुद्दों पर समर्थन जुटाने के लिए नए राजनीतिक समीकरण बनाए जा सकते हैं। 

बीजेपी की नजर खास तौर पर तमिलनाडु की राजनीति पर है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने डीएमके के साथ भी संपर्क साधा है और ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ विधेयक के मौजूदा मसौदे में बदलाव के संकेत दिए हैं, ताकि दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर किया जा सके। 

डीएमके ने रखी अपनी शर्तें
डीएमके के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी का रुख हमेशा तमिलनाडु के हितों को ध्यान में रखकर तय होता है. पार्टी का मानना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनकी संसदीय हिस्सेदारी कम नहीं होनी चाहिए। 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर केंद्र सरकार यह भरोसा दिलाती है कि दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित नहीं होगा और संसद में उनकी आवाज कमजोर नहीं पड़ेगी, तो प्रस्तावों पर विचार किया जा सकता है. हालांकि उन्होंने बीजेपी के साथ किसी राजनीतिक गठजोड़ की संभावना को फिलहाल समय से पहले बताया। 

ये भी पढ़ें :  Amit Shah In Chhattisgarh : दंतेवाड़ा में अमित शाह, मां दंतेश्वरी से आशीर्वाद लेकर भाजपा की परिवर्तन यात्रा को दिखाएंगे हरी झंडी

वन नेशन-वन इलेक्शन पर भी काम जारी
उधर, ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ विधेयक पर भी काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. फिलहाल यह प्रस्ताव 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास है. समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी का कहना है कि रिपोर्ट पर तेजी से काम हो रहा है और निर्धारित समय के भीतर इसे संसद को सौंप दिया जाएगा। 

बीजेपी नेताओं का मानना है कि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जा सकती है. इसके तहत विभिन्न राज्यों की विधानसभा चुनाव समयसारिणी को धीरे-धीरे लोकसभा चुनावों के साथ समायोजित किया जा सकता है। 

विपक्ष ने उठाए सवाल
उधर कांग्रेस ने साफ किया है कि परिसीमन जैसे संवैधानिक महत्व के मुद्दे पर सरकार को सभी दलों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार को पहले सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और अपने प्रस्ताव लिखित रूप में सामने रखने चाहिए। 

कांग्रेस का आरोप है कि पिछली बार सरकार ने कुछ क्षेत्रीय दलों से अनौपचारिक बातचीत तो की, लेकिन मुख्य विपक्षी दलों को विश्वास में नहीं लिया. पार्टी का कहना है कि संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण मामलों में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। 

ये भी पढ़ें :  क्या नमाज पढ़ने के लिए अब लेनी होगी अनुमति? कांग्रेस MLA का अपनी ही सरकार से तीखा सवाल

बंगाल की राजनीति पर भी नजर
सूत्रों के अनुसार बीजेपी पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी करीबी नजर बनाए हुए है. पार्टी नेताओं का मानना है कि बंगाल चुनाव रिजल्ट के बाद टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और आंतरिक मतभेद भविष्य में संसद के भीतर नए राजनीतिक समीकरण पैदा कर सकते हैं। 

हालांकि ममता बनर्जी लगातार बीजेपी पर राजनीतिक दबाव और प्रताड़ना के आरोप लगाती रही हैं. उनका कहना है कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन टीएमसी इससे डरने वाली नहीं है। 

बड़ा सियासी मुद्दा बन सकते हैं दोनों बिल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि परिसीमन और ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ दोनों ही मुद्दे आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रह सकते हैं. एक ओर केंद्र सरकार इन्हें प्रशासनिक सुधार और चुनावी खर्च कम करने से जोड़ रही है, वहीं विपक्षी दल इन्हें संघीय ढांचे और राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़े संवेदनशील मुद्दे के रूप में देख रहे हैं. ऐसे में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इन दोनों प्रस्तावों पर देशभर में व्यापक राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है। 

 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment