गैस त्रासदी के जख्म भरने की पहल, भोपाल की जहरीली मिट्टी और भूजल को किया जाएगा शुद्ध

भोपाल 

मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे के खात्मे के बाद अब प्रदेश और भोपाल पर लगे इस त्रासदी के आखिरी दाग को भी धोने की तैयारी शुरू कर दी है। यूनियन कार्बाइड (यूका) परिसर व आसपास के 2 किमी क्षेत्र में दूषित मिट्टी और भूजल का उपचार कराने के साथ जंग लगे यूका प्लांट के ढांचे को हटाने ओर जहर को विसंक्रमण करने का आकलन कराया जा रहा है। प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। जमीन और भूजल में घुले जहर को दूर करने के बाद आगे की योजना पर काम शुरू होगा।

यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआइएल) की शुरुआत 1969 में भोपाल में कीटनाशकों के निर्माण के लिए हुई थी। 1979 में मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआइसी) निर्माण के लिए विशेष इकाई लगी। 1984 में गैस त्रासदी के बाद सरकार ने संयंत्र को कब्जे में लिया, फिर यहां कोई काम नहीं हुआ। त्रासदी के बाद यूका के जहरीले कचरे को बोरों में भरकर तलघर में रखवाया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने पीथमपुर में इसे नष्ट कराया।

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हाईकोर्ट के निर्देशों पर अमल कर अब सरकार ने परिसर की मिट्टी और भूजल के साथ प्लांट का जहर भी खत्म कराने की तैयारी की है। भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग ने इसके लिए एजेंसियों और संस्थानों से प्रस्ताव मंगाए हैं। 

तीन चरणों में होगा काम

पहले चरण में साइट का प्रारंभिक आकलन होगा। दूसरे चरण में सूक्ष्मता से इन्वेस्टिगेशन और तीसरे चरण में इम्पैक्ट असेसमेंट स्टडी कराई जाएगी।

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    पहले चरण में विशेषज्ञों की टीम यूका परिसर के दस्तावेज- नक्शे देखेगी। आसपास के क्षेत्र का अध्ययन व नीरी, सीएसआइआर की पुरानी रिपोर्टों की जांच, फिर परिसर और आसपास के क्षेत्र की हाइड्रोजियोलोजी संबंधी डेटा और रिपोट्र्स देखेगी। परिसर की टोपोग्राफी, जियोलोजी, भूजल के एक्विफर और कैचमेंट एरिया का आकलन होगा। जमीन और भूजल के सैंपल के लिए जगह चिह्नित किए जाएंगे।

    हेल्थ और सुरक्षा प्लान बनेगा ताकि किसी को नुकसान न हो। हाइड्रोजियोलोजिकल स्टडी के दौरान सतह की मिट्टी के साथ तालाब, डंप एरिया से सैंपल लिए जाएंगे। प्रदूषण का फैलाव आंकेंगे। यूका परिसर और आसपास 2 किमी एरिया से मिट्टी के 50 सेंपल और भूजल के 15 सेंपल 189 पैरामीटर पर परखेंगे। संक्रमित कचरे का निपटारा होगा। एक रेमेडियल एंड रिहेबिलिटेशन एकशन प्लान भी बनेगा।

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    खतरनाक अपशिष्ट और दूषित मिट्टी की सेंपलिंग और उपचार, भंडारण, निपटान का आकलन अध्ययन पर्यावरण प्रभाव (ईआइए) के सिद्धांतों और नियमों के अनुसार होगा। इसके तहत क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय आकलन, मिट्टी, भूजल, सतही जल निकायों, स्वास्थ्य प्रभाव परिवहन- निस्तारण के खतरे का आकलन और उससे निपटने की तरीके भी तय किए जाएंगे।

प्रमुख बिंदु

यूका के दो किलोमीटर क्षेत्र में प्रदूषण
दूषित मिट्टी- भूजल होगा शुद्ध
विशेषज्ञों की टीम से जांच और समाधान की तैयारी
प्रस्ताव मंगाए

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