एमपी के नर्सिंग छात्रों को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने परीक्षा और रिजल्ट जारी करने की दी अनुमति

 जबलपुर

 हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में सीबीआई जांच में उपयुक्त (सूटेबल) पाए गए नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए लंबित परीक्षाओं और परीक्षा परिणामों का रास्ता साफ कर दिया है। मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और विशाल बघेल उपस्थित रहे, जबकि राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखा।

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हाई कोर्ट ने लाॅ-स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल को शैक्षणिक सत्र 2022-23 के जीएनएम प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित करने व सत्र 2021-22 के करीब 9,000 विद्यार्थियों के लिए जीएनएम तृतीय वर्ष की परीक्षा आयोजित करने की अनुमति प्रदान की।

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सुनवाई के दौरान काउंसिल ने लंबित परीक्षाएं व परिणाम जारी करने की अनुमति मांगी, जबकि याचिकाकर्ता ने सीबीआई जांच में अनुपयुक्त पाए गए कॉलेजों के छात्रों को राहत दिए जाने का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने केवल उन संस्थानों को राहत दी जो जांच में मानकों के अनुरूप पाए गए हैं।

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हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच के दायरे में आए 695 कॉलेजों में से 156 सूटेबल कॉलेजों व कमियां दूर कर उपयुक्त घोषित किए गए 89 कॉलेजों के लिए ही परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शेष संस्थानों से संबंधित परीक्षाओं पर फिलहाल रोक जारी रहेगी।

 

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