योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण

26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियां हो चुकी हैं अधिसूचित, 36 जिलों से नए प्रस्ताव मिले

जल संरक्षण, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए सरकार चला रही विशेष अभियान

लखनऊ,
  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।
     मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं।

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इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां
आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं।

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सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर
योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है।

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अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी
सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

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