होर्मुज के बाद अब इस समुद्री रूट पर संकट की चेतावनी, कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका

 नई दिल्‍ली

अमेरिका और ईरान के बीच जंग फिर शुरू हो चुकी है, जिस कारण स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों का आवगमन रुक सा गया है. ज्‍यादातर जहाज रात के अंधेरे में या गुप्‍त तरीके से जा रहे हैं, लेकिन फिर भी पूरी क्षमता के साथ जहाज निकल नहीं आ पा रहे हैं। 

इस तनाव की वजह से कच्‍चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप वहां से गुजरने वाले जहाजों से 20 फीसदी टैक्‍स वसूलने की बात कर रहे हैं, जिससे अब ये तनाव और गहराता हुआ दिख रहा है और कच्‍चे तेल की कीमतों में और उछाल आने की संभावना बन रही हैं। 

इस बीच,  यमन धमकी देने लगा है कि वह होर्मुज की तरह ही एक और रास्‍ता बंद कर देगा, जिससे कच्‍चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. ग्‍लोबल स्‍तर पर महंगाई रिकॉर्ड स्‍तर पर पहुंच सकती है. साथ ही दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट आ सकती है।  

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यमन ने क्‍या दी धमकी? 
दरअसल, ग्‍लोबल एनर्जी सप्‍लाई और समुद्री व्‍यापार को लेकर चिंतओं के बीच, यमन ने रणनीतिक तौर पर महत्‍वपूर्ण बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्‍य को बंद करने की धमकी दी है. बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab-el-Mandeb Strait) होर्मुज की तरह से ही एक चोकपॉइंट है. यह जलमार्ग लाल सागर (Red Sea) को अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) और हिंद महासागर से जोड़ता है। 

अगर ये रास्‍ता बंद हो गया तो ग्‍लोबल शिपिंग बाधित हो सकती है. कच्‍चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और भारत के व्‍यापार मार्गों को प्रभावित कर सकती है। 

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि अगर सऊदी अरब यमन के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को निशाना बनाना जारी रखता है, तो बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया जा सकता है। 

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200 डॉलर तक जा सकती है तेल की कीमत
प्रेस टीवी ने सोमवार को अल-फराह के हवाले से कहा कि अगर मौजूदा स्थिति और बिगड़ती है, तो बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और होर्मुज जलडमरूमध्य को एक कार्यकारी गठबंधन के तहत बंद कर दिया जाएगा. तब तेल की कीमतें आसमान छूकर 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएंगी, जो एक भयानक झटका होगा। 

क्‍यों इतना खास है ये समुद्री मार्ग? 
बाब अल-मंडेब, अरब प्रायद्वीप और अफ्रीका के हॉर्न के बीच एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है, जिससे यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक बन जाता है. यह रास्‍ता स्‍वेज नहर के साउथ एंट्री गेट के तौर पर भी काम करता है और ग्‍लोबल समुद्री व्‍यापार का लगभग 10 से 12 फीसदी हिस्‍सा उठाता है, जिसमें ग्‍लोबल एनर्जी शिपमेंट का एक खास हिस्‍सा शामिल है। 

भारत के लिए यह क्यों मायने रखता है?
होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद, भारत कच्चे तेल और LNG के आयात के लिए पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्सों पर निर्भर है. निर्यात के लिए भी यह मार्ग उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्राइवेट और पब्लिक भारतीय रिफाइनर्स नियमित रूप से इस जलडमरूमध्य के माध्यम से यूरोपीय खरीदारों को रिफाइन पेट्रोलियम उत्पाद भेजते हैं। 

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भारत के लगभग 95% व्यापार का संचालन समुद्र के रास्ते होता है, ऐसे में बाब अल-मंडेब यूरोप, उत्तरी अमेरिका और उत्तरी अफ्रीका को निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है. स्वेज नहर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य मिलकर भारत के कुल विदेशी व्यापार का लगभग 35% सुगम बनाते हैं. वस्त्र, परिधान, दवाइयां, मशीनरी और बासमती चावल समेत कृषि उत्पाद जैसे थोक निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं. यूरोप को निर्यात होने वाले भारतीय माल का लगभग 80% हिस्सा लाल सागर क्षेत्र से होकर गुजरता है। 

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