15 जुलाई को अस्त हुए गुरु, इन राशियों को रहना होगा सावधान

ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को सबसे शुभ और कल्याणकारी ग्रह माना गया है.  वे ज्ञान, धन, विवाह, संतान और धर्म के कारक हैं. जब भी गुरु अस्त होते हैं, तो उनका प्रभाव कमजोर पड़ जाता है.  जुलाई 2026 में गुरु का कर्क राशि में अस्त होना एक अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय और ज्योतिषीय घटना है, जो सभी 12 राशियों के जीवन को प्रभावित करेगी.

गुरु अस्त का समय और महत्व
ज्योतिष गणना के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति 15 जुलाई 2026 को कर्क राशि में अस्त हो गए हैं और 12 अगस्त 2026 तक अस्त अवस्था में रहेंगे.  जब गुरु अस्त होते हैं, तो उनकी शुभ दृष्टि का असर कम हो जाता है. यही कारण है कि इस एक महीने की अवधि में शादी-विवाह, नए घर का निर्माण, गृह प्रवेश, मुंडन या कोई भी बड़ा धार्मिक अनुष्ठान करने से मना किया जाता है.  माना जाता है कि इस दौरान शुभ कार्यों में किए गए प्रयास पूर्ण फल नहीं देते हैं.

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राशियों पर इसका प्रभाव
गुरु के अस्त होने से सभी राशियाँ प्रभावित होंगी, लेकिन कुछ राशियों को विशेष रूप से सावधानी बरतने की आवश्यकता है.

कर्क राशि: चूंकि गुरु आपकी ही राशि में अस्त हो रहे हैं, इसलिए आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. मानसिक तनाव बढ़ सकता है . निर्णय लेने में भ्रम की स्थिति बनी रह सकती है. निवेश करने से बचें.

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वृश्चिक और मीन राशि: इन राशियों के लिए यह समय कार्यस्थल पर चुनौतियां लेकर आ सकता है. वरिष्ठ अधिकारियों या सहकर्मियों के साथ मतभेद हो सकते हैं.  धैर्य रखना ही एकमात्र उपाय है.

मकर और सिंह राशि: आर्थिक मोर्चे पर यह समय थोड़ा कठिन हो सकता है. बेवजह के खर्च बढ़ सकते हैं. अपनी बचत को सुरक्षित रखें .

समस्या निवारण और उपाय
गुरु के अस्त होने के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए ज्योतिषीय उपाय बहुत प्रभावी हो सकते हैं.

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भगवान विष्णु की पूजा: इस अवधि में भगवान विष्णु या बृहस्पति देव की नियमित पूजा करें. "ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम:" मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी है.

पीली वस्तुओं का दान: गुरु से संबंधित चीजें जैसे चने की दाल, गुड़, या पीले कपड़े का दान करें.

वाणी में संयम: इस महीने वाद-विवाद से पूरी तरह बचें. अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें,  किसी को भी कठोर शब्द बोलने से बचें.

बड़ों का सम्मान: अपने घर के बुजुर्गों और शिक्षकों का सम्मान करें, क्योंकि ये गुरु के प्रत्यक्ष रूप माने जाते हैं.

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