मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर अपराधियों पर लगातार कार्रवाई

भोपाल 

मध्‍यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधों की रोकथाम, अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई एवं पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेशभर में लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में राजगढ़ एवं नर्मदापुरम पुलिस ने अलग-अलग प्रकरणों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करते हुए न केवल साइबर अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की, बल्कि पीड़ितों को उनकी ठगी गई राशि वापस दिलाने तथा अंतर्राज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार करने में भी सफलता हासिल की।

प्रदेशभर में साइबर अपराधों के विरुद्ध की जा रही इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट हुआ है कि समय पर शिकायत दर्ज कराने, तकनीकी अनुसंधान एवं विभिन्न बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करने से साइबर ठगी की राशि वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

राजगढ़ में डिजिटल अरेस्ट एवं ऑनलाईन निवेश के नाम पर ठगी गई पूरी राशि लौटाई

राजगढ़ पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर एक ऑटो चालक से ठगे गए 60 हजार रूपए की पूरी राशि सफलतापूर्वक वापस कराई। आरोपियों ने स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर अश्लील वीडियो देखने का झूठा आरोप लगाते हुए कार्रवाई का भय दिखाया और पीड़ित से धनराशि ट्रांसफर करवा ली थी। प्रकरण में उत्तरप्रदेश के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तथा एक विधि-विरुद्ध बालक को भी प्रकरण में चिन्हित किया गया।

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वहीं एक अन्य मामले में शेयर ट्रेडिंग एवं ऑनलाइन निवेश पर अधिक लाभ का लालच देकर की गई साइबर धोखाधड़ी में पीड़ित के 1लाख 64 हजार रूपए की संपूर्ण राशि वापस कराई। आरोपी ने डीमैट अकाउंट का एक्सेस प्राप्त कर धोखाधड़ी की थी। मामले में राजस्थान निवासी आरोपी के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई।

नर्मदापुरम पुलिस ने साइबर ठगी के अंतर्राज्यीय आरोपियों को किया गिरफ्तार

जिले के थाना देहात क्षेत्र में एक महिला के साथ कस्टमर केयर फ्रॉड के माध्यम से 99 हजार रूपए की साइबर धोखाधड़ी की गई थी। आरोपियों ने स्वयं को ZODIAC कंपनी का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर कपड़ों की बुकिंग की राशि वापस करने का झांसा दिया और पीड़िता के बैंक खाते से 99 हजार रूपये की धोखाधड़ी कर ली। तकनीकी साक्ष्यों, बैंक ट्रांजेक्शन एवं साइबर सेल की सहायता से पुलिस ने केरल एवं महाराष्ट्र में कार्रवाई कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

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तकनीकी अनुसंधान और त्वरित समन्वय से मिली सफलता

इन सभी मामलों में संबंधित जिला पुलिस, साइबर सेल, बैंकिंग संस्थानों एवं अन्य एजेंसियों के बीच त्वरित समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाही की गई। जिसके परिणाम स्वरूप राजगढ़ में दोनों मामलों में 2 लाख 24 हजार रूपए की संपूर्ण राशि पीड़ितों को वापस कराई गई, जबकि नर्मदापुरम में अंतर्राज्यीय साइबर ठगों को गिरफ्तार कर प्रकरण की विस्तृत विवेचना जारी है।

मध्यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि—      

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किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, पासवर्ड, बैंक खाता, यूपीआई पिन, डीमैट अकाउंट अथवा अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें।     

स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी, बैंक अधिकारी या किसी अन्य सरकारी संस्था का अधिकारी बताकर यदि कोई व्यक्ति डिजिटल अरेस्ट, निवेश पर दोगुना लाभ, रिफंड या अन्य किसी बहाने से धनराशि मांगता है तो उसकी बातों में बिल्कुल न आएं। 

 भारत में "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई वैधानिक प्रक्रिया नहींहै।           

किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर गोल्डन ऑवर के भीतर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर निकटतम पुलिस थाना या साइबर सेल से संपर्क करें। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि होल्ड एवं रिकवर कराए जाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

 

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