ईरान युद्ध में अमेरिका का मिसाइल भंडार खाली होने की कगार पर! स्टॉक में भारी कमी की रिपोर्ट

वाशिंगटन

अमेरिका और ईरान के बीच पांच महीने से चल रहे युद्ध ने अमेरिकी सैन्य भंडार पर गहरा असर डाला है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सेना ने अपनी अत्यधिक सटीक लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया है. आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम यानी ATACMS और PrSM का लगभग पूरा स्टॉक इस्तेमाल हो चुका है। 

ये मिसाइलें सुरक्षित दूरी से सटीक हमले करने की क्षमता रखती हैं. प्रत्येक की कीमत दस लाख डॉलर से अधिक है. वैश्विक टोमाहॉक क्रूज मिसाइल आपूर्ति का भी आधा हिस्सा खर्च हो गया है. यह जानकारी पहले सार्वजनिक नहीं हुई थी. अमेरिकी सैन्य तैयारियों को लेकर चिंता पैदा कर रही है।

ATACMS और PrSM मुख्य रूप से जमीन से जमीन पर मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें हैं. एटीएसीएमएस का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में भी हुआ था जहां इन्होंने रूसी ठिकानों पर हमले में मदद की. पीआरएसएम नई और अधिक एडवांस है जो एटीएसीएमएस की जगह ले रही है. युद्ध शुरू होने से पहले सेंट्रल कमांड के पास जो भूमि आधारित मिसाइलें थीं वे लगभग समाप्त हो गईं लेकिन अन्य जगहों से आपूर्ति करके उन्हें फिर से भरा गया। 

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माहॉक मिसाइलें जहाजों, क्रूजरों और पनडुब्बियों से दागी जाती हैं. मजबूत रक्षा वाले ठिकानों पर पायलटों को जोखिम में डाले बिना हमला करने का मुख्य साधन रही हैं. इनके अलावा रक्षात्मक हथियारों का भी बड़ा हिस्सा खर्च हुआ. सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी से जुलाई तक पैट्रियट इंटरसेप्टर का करीब 65% और THAAD बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर का कम से कम 38% स्टॉक कम हो गया. ये सिस्टम आने वाली मिसाइलों को नष्ट करने में प्रभावी माने जाते हैं। 

क्यों खर्च हुआ इतना बड़ा भंडार
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में इजरायल के साथ मिलकर ईरान युद्ध शुरू किया था और इसे छोटा संघर्ष बताया था. लेकिन युद्ध लंबा खिंच गया. प्रशासन ने जोखिम भरे पायलट वाले बमबारी मिशनों से बचने के लिए इन सटीक मिसाइलों का अधिक इस्तेमाल किया. ये हथियार सुरक्षित दूरी से हमला करने देते हैं इसलिए मजबूत वायु रक्षा वाले दुश्मन जैसे चीन के खिलाफ भी मूल्यवान माने जाते हैं। 

मिसाइल भंडार में कमी को लेकर प्रशासन के अंदर तनावपूर्ण चर्चाएं हुईं कि अमेरिका कितने समय तक ईरान पर हमले जारी रख सकता है बिना अन्य संकटों का जवाब देने की क्षमता खोए. कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि सैन्य सलाहकारों ने भंडार की चेतावनी दी जिसके चलते बड़ा हमला टाला गया. एक अमेरिकी अधिकारी ने इसे खाड़ी देशों के दबाव से जोड़ा। 

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अधिकारियों को डर है कि कम स्टॉक रूस और चीन जैसे विरोधियों को रोकने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. अगर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले दोबारा शुरू हुए तो राष्ट्रपति ट्रंप को अधिक जोखिम वाले पायलट मिशनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। 

रक्षात्मक हथियारों की कमी भी चिंता का विषय है क्योंकि ये अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों की रक्षा करते हैं. सैन्य नेताओं ने हफ्तों से पैट्रियट जैसी रक्षात्मक मिसाइलों के घटते भंडार की चेतावनी दी थी. विश्लेषकों का कहना है कि कुछ गोला-बारूद और मिसाइलों का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है लेकिन लंबे युद्ध के लिए आपूर्ति पर्याप्त नहीं पड़ सकती। 

व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति ट्रंप का बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि अमेरिका के पास दुनिया में सबसे अधिक गोला-बारूद है और जरूरत से कहीं ज्यादा. रक्षा कंपनियां इस समय पहले से कहीं अधिक उत्पादन कर रही हैं और संयंत्रों का विस्तार रिकॉर्ड स्तर पर हो रहा है. पेंटागन प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली है. राष्ट्रपति के चयनित समय व स्थान पर काम करने के लिए सब कुछ उपलब्ध है। 
लॉकहीड मार्टिन  ATACMS, PrSM और THAAD बनाती है जबकि रेथियॉन टोमाहॉक और पैट्रियट बनाती है. रेथियॉन ने टोमाहॉक उत्पादन बढ़ाने के लिए पेंटागन के साथ बहुवर्षीय समझौते की दिशा में प्रगति की है. सेना ने कहा है कि एटीएसीएमएस को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है. उत्पादन पीआरएसएम की ओर शिफ्ट हो रहा है. 2027 के लिए बड़ी संख्या में पीआरएसएम का ऑर्डर दिया गया है। 

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यह स्थिति आधुनिक युद्ध में सटीक गोला-बारूद की मांग और आपूर्ति के असंतुलन को उजागर करती है. छोटे समझे गए संघर्ष लंबे खिंच सकते हैं. भंडार पर दबाव डाल सकते हैं. अमेरिका अन्य क्षेत्रों में भी तैनाती बनाए रखना चाहता है इसलिए वैश्विक आपूर्ति का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण है. उत्पादन बढ़ाने के प्रयास जारी हैं लेकिन नई मिसाइलें बनाने में समय लगता है। 

 

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