प्रदेश के कॉलेजों में परंपरागत पढ़ाई के साथ अब विद्यार्थियों को मिलेगी रोजगारोन्मुखी शिक्षा

भोपाल 

प्रदेश के महाविद्यालयों में परंपरागत विषयों की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को अब रोजगार की बदलती जरूरतों के अनुरूप शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा उच्च शिक्षा को उद्योग, अनुसंधान, तकनीक और रोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। विभाग ने देश के 30 राष्ट्रीय संस्थानों के साथ एमओयू किया है।

इसके माध्यम से महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को उनके पारंपरिक पाठ्यक्रमों के साथ रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को वर्तमान औद्योगिक एवं तकनीकी जरूरतों के अनुरूप आवश्यक ज्ञान, कौशल और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।

इस पहल के तहत विद्यार्थियों के लिए ऐसे पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जाएंगे, जिनसे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि हो सके। साथ ही उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए विद्यार्थियों को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ा जा सके। इसके साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रोडमैप भी तैयार किया जाएगा। इससे महाविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के साथ विद्यार्थियों को अनुसंधान, तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।

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विभाग की इस पहल से प्रदेश के विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक कौशल और व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा, जिससे वे उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद रोजगार और करियर की बेहतर संभावनाओं के लिए तैयार हो सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि यह एमओयू 4 अगस्त को राज्यपाल  मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार की उपस्थिति में किया जा चुका है।

देश के इन राष्ट्रीय संस्थानों के साथ विभाग ने किया एमओयू

उच्च शिक्षा विभाग ने देश के जिन 30 राष्ट्रीय संस्थानों के साथ एमओयू किया है, उसमें आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी रुड़की, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी मद्रास, आईआईटी गुवाहटी, आईआईटी वाराणसी, आईआईएम इंदौर, आईएमडी दिल्ली, आईसीएआई दिल्ली, वाधवानी फाउंडेशन दिल्ली, आईसीएफआरई जबलपुर, सीएसआईआर-एएमपीआरआई भोपाल, एनआईटीटीटीआर भोपाल, मध्यप्रदेश पुलिस, श्रम विभाग मध्यप्रदेश,अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (एआईजीजीपीए) एनएफएसयू भोपाल, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी) भोपाल, आईआईएफएम भोपाल, आरआईई भोपाल, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल, उद्यानिकी विभाग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, कोलकाता, एबीवी-आईआईआईटीएम ग्वालियर, आईसीएआर-आईआईएसएस भोपाल, आईसीएआर-सेंट्रल इंटीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग भोपाल, आरआरसीएटी इंदौर, यूजीसी-डीएई सीएसआर इंदौर,आईआईटी पटना शामिल है।

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विद्यार्थियों को यह होगा फायदा

देश के 30 विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ एमओयू होने से विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुसंधान, तकनीक, कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक अवसर मिलेंगे। इस साझेदारी के माध्यम से विद्यार्थियों को जलवायु साक्षरता एवं मौसम विज्ञान आधारित अनुसंधान, वन, जैव विविधता एवं जलवायु परिवर्तन अनुसंधान तथा कृषि एवं मृदा विज्ञान अनुसंधान से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही वैज्ञानिक अनुसंधान एवं उन्नत प्रौद्योगिकी के माध्यम से नवाचार, कृषि नवाचार एवं तकनीक आधारित उच्च शिक्षा, पर्यावरणीय नेतृत्व एवं सतत विकास के लिए ज्ञान साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा। फोरेंसिक विज्ञान एवं साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों में विद्यार्थियों की समझ और दक्षता विकसित की जाएगी। सुरक्षित, जागरूक एवं उत्तरदायी नागरिक निर्माण में भी मदद मिलेगी। रोजगारोन्मुखी शिक्षा एवं कौशल विकास, श्रमिक अधिकारों के प्रति जागरूकता, तकनीकी दक्षता, नवाचारी शिक्षण तथा संकाय क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। शिक्षक शिक्षा और शैक्षणिक गुणवत्ता संवर्धन के क्षेत्र में भी संस्थागत सहयोग विकसित होगा।

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विभाग की इस पहल से विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और उद्योग की आवश्यकताओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता और भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मक दक्षता मजबूत होगी।

शिक्षा और कौशल विकास के लिए बेहतर रोडमैप तैयार किया जाएगा

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग  अनुपम राजन ने बताया कि शिक्षा के वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए कॉलेजों में परंपरागत विषयों की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा मिले, इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विशेष पहल की गई है। देश के 30 राष्ट्रीय संस्थानों के साथ विभाग ने एमओयू किया है। इन संस्थानों के माध्यम से युवाओं के लिए शिक्षा और कौशल विकास के लिए बेहतर रोडमैप तैयार किया जाएगा।

 

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