ईरान से बातचीत नहीं करेगा अमेरिका? ट्रंप का बड़ा बयान, होर्मुज पर नाकेबंदी का भी दावा

वॉशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहाकि ईरान के साथ बातचीत की कोई योजना नहीं है। हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज पर हमले की खबर के बावजूद यह जलमार्ग खुला हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में होर्मुज से जहाजों की आवाजाही कम हो रही है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहाकि वहां अमेरिकी नाकेबंदी पूरी तरह से लागू है। साथ ही यह भी दावा किया कि सभी समुद्री बारूदी सुरंगें हटा दी गई हैं। डोनाल्ड ट्रंप की यह पोस्ट अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के 60 दिनों का दौर इस हफ्ते खत्म होने के बाद आई है।

ये भी पढ़ें :  प्रधानमंत्री मोदी ने किया आतंकवाद के विरूद्ध भारत की नीति का उद्घोष : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ईरान ने क्या कहा
इस बीच ईरान का भी बयान आया है। ईरान का कहना है कि होर्मुज तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका जून में किए गए अंतरिम समझौते के तहत तेहरान की शर्तें पूरी नहीं करता है। शीर्ष ईरानी वार्ताकार मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहाकि इन शर्तों में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी हटाना, तेल पर रोक हटाना, ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना और सभी मोर्चों पर धमकियों और सैन्य कार्रवाइयों को खत्म करना शामिल है।

ये भी पढ़ें :  श्रीलंका में भीषण बारिश-भूस्खलन से 31 की मौत, पर्वतीय इलाकों में तबाही जारी

ईरानी विदेश मंत्री बोले-वॉशिंगटन झुक रहा
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस बीच यह बात खारिज कर दी कि उनका देश समर्पण करने वाला है। साथ ही यह भी दावा किया कि वॉशिंगटन अब ईरानी शर्तों पर बातचीत करना चाहता है। अराघची ने कहाकि जंग में अमेरिका का उद्देश्य ईरान को समर्पण करने पर मजबूर करना था, लेकिन हम समर्पण नहीं करेंगे। उन्होंने जोड़ा कि अमेरिका अब हमारे शर्तों के अनुसार हमसे बातचीत करने की भीख मांग रहा है।

ये भी पढ़ें :  ऑपरेशन सिंदूर से कांपे आतंक के आका, PoK छोड़ अब नए ठिकानों की तलाश

अराघची ने क्या कहा
अराघची ने यह भी कहाकि अमेरिका के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन में ईरान के पक्ष में 13 प्रावधान हैं। एक वॉशिंगटन के पक्ष में है, जबकि इजरायल पर तोड़-फोड़ करने और इसके कार्यान्वयन को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने का आरोप लगाया। हमने युद्ध जीता, और हम कूटनीति में भी जीते और हमने दुश्मन को हमारी शर्तों को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। अराघची ने यह भी कहाकि ईरान की सैन्य और युद्धक्षेत्र क्षमताओं ने वार्ता में अपनी स्थिति को मजबूत किया है।

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment