लखनऊ-कानपुर के बीच 67 किमी नमो भारत कॉरिडोर का खाका तैयार, डीपीआर प्रक्रिया शुरू

लखनऊ
लखनऊ-कानपुर के बीच प्रस्तावित नमो भारत ट्रेन का प्रारंभिक खाका तैयार हो गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (एएआर) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराने के लिए संबंधित विकास प्राधिकरणों को उनके हिस्से का खर्च वहन करने का प्रस्ताव भेज दिया है। प्रस्तावित कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 67 किलोमीटर है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा उन्नाव-शुक्लागंज क्षेत्र का होगा।

एनसीआरटीसी के अनुसार आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर का डीपीआर तैयार करने पर 6.03 करोड़ रुपये खर्च होगा। इसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण, उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण और कानपुर विकास प्राधिकरण को उनकी सीमा में आने वाली प्रस्तावित रेल लाइन की लंबाई के आधार पर खर्च वहन करना होगा।

उन्नाव में 48 किलोमीटर होगा कारिडोर
प्रस्ताव के मुताबिक नमो रेल का सबसे लंबा हिस्सा उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण क्षेत्र में आएगा। लगभग 48 किलोमीटर लंबाई होगी। इस हिस्से के अध्ययन और डीपीआर पर 4.32 करोड़ रुपये खर्च होगा। वहीं लखनऊ विकास प्राधिकरण क्षेत्र में करीब 16 किलोमीटर लाइन प्रस्तावित है। जिसके लिए 1.44 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कानपुर विकास प्राधिकरण क्षेत्र में मात्र 3 किलोमीटर कॉरिडोर प्रस्तावित होने से उसका हिस्सा केवल 27 लाख रुपये रखा गया है।

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शासन के निर्देश पर आगे बढ़ी प्रक्रिया
शासन के निर्देशों के बाद एनसीआरटीसी ने तीनों विकास प्राधिकरणों को पत्र भेजकर अपने-अपने हिस्से की धनराशि उपलब्ध कराने की कार्रवाई शुरू करने को कहा है। अधिकारियों का कहना है कि डीपीआर तैयार होने के बाद स्टेशन, एलाइनमेंट, भूमि आवश्यकता और परियोजना लागत का अंतिम स्वरूप सामने आएगा।

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लखनऊ-कानपुर के बीच तेज और सुरक्षित होगा सफर
लखनऊ और कानपुर के बीच प्रतिदिन लाखों लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में नमो भारत आरआरटीएस परियोजना दोनों महानगरों के बीच तेज, सुरक्षित व आधुनिक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। परियोजना के क्रियान्वयन से यात्रा समय में बड़ी कमी आने की उम्मीद है, जबकि उन्नाव को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

99 प्रतिशत से ज्यादा है नमो भारत ट्रेनों की पंचुएलिटी
आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने मानसून सत्र के दौरान बताया था कि नमो भारत ट्रेनों की पंचुएलिटी (समय की पाबंदी) 99% से अधिक रही है, जो इसे बेहद भरोसेमंद परिवहन साधन बनाती है। उन्होंने यह भी बताया कि रिजनल कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए सरकार ने पहले चरण में तीन मुख्य कॉरिडोर को प्राथमिकता दी है, जिसमें ​दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ (जो पूरी तरह चालू हो चुकी है) अब ​दिल्ली-गुरुग्राम-अलवर और ​दिल्ली-पानीपत सर्वोच्च प्राथमिकता में है।

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क्या है भविष्य की योजनाएं
केन्द्रीय मंत्री ने भविष्य की योजनाओं के संबंध में यह भी जानकारी दी है कि नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) ने कई अन्य रूटों के लिए भी अपनी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) जमा कर दी है, जिसमें ​दिल्ली से करनाल, ​दिल्ली से बावल और बावल से बहरोड़, ​गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) तक का प्रस्तावित लिंक भी शामिल है। सरकार इन सभी प्रोजेक्ट की जांच करा रही है। वित्तीय व्यवहार्यता के आधार पर आगे के फैसले लिए जाएंगे।

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