ज्यादा काम नहीं कर सकता…’ नितिन गडकरी के बयान से मची हलचल, नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपने की बात

 नागपुर

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कह दिया है कि अब वे पहले जितना काम नहीं कर सकते और अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी को जिम्मेदारियां सौंपी जाएं. नागपुर के एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि हाल-फिलहाल में सार्वजनिक कार्यों में उनकी हिस्सेदारी बहुत कम हो गई है. उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी को मौका दिया जाए। 

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि वे पहले जितना काम नहीं कर पा रहे हैं और अब जिम्मेदारी नई पीढ़ी के हाथों में सौंप दी जानी चाहिए। नागपुर के 'एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग' के कार्यक्रम में गडकरी ने यह बात कही।

गडकरी के इस बयान के बाद महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति में कयास लगने शुरू हो गई है। बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक गलियारों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। यही वजह है कि गडकरी के इस बयान को भावी राजनीतिक और संगठनात्मक बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

खास बात यह है कि नितिन गडकरी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब केंद्रीय कैबिनेट के फेरबदल को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. गडकरी ने बताया कि कैसे रोजमर्रा के कामों में अब उनकी भागीदारी कम हो गई है. उनका कहना है कि अब नई पीढ़ी को काम सौंप कर पुरानी पीढ़ी को उनका मार्गदर्शन करना चाहिए। 

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नितन गडकरी ने कहा, "मैं पिछले 30 सालों से लगातार सार्वजनिक जीवन में काम कर रहा हूं. इस दौरान मैंने कई उतार-चढ़ाव भी देखे, कई बार पुरस्कृत भी हुआ. लेकिन अब मैं ज्यादा काम नहीं कर सकता. मुझे लगता है कि अब नई पीढ़ी को काम करने का मौका देना चाहिए। 

हालांकि, गडकरी ने इसके तुरंत बाद विकास कार्यों की बात करना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि आगे आने वाले समय में विकास का दायरा और बढ़ेगा. उनका लक्ष्य है कि महाराष्ट्र का कोई आदिवासी गांव बिजली से वंचित न रहे और राज्य में विकास साफ दिखाई दे। 

कोरोना के बाद सेहत सुधारने पर दिया ध्यान
गडकरी ने अपने पुराने दिनों का एक मजेदार किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया, 'जवानी के दिनों में मेरी जीवनशैली बहुत ही अनियंत्रित थी। पार्टी का काम करते समय शाम को समोसा खाकर सो जाता था। लेकिन कोविड के बाद मैंने अपनी सेहत पर ध्यान देना शुरू किया है।' युवाओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा, ‘अब मैं रोज सुबह उठकर ढाई घंटे एक्सरसाइज और प्राणायाम करता हूं। मेरा ट्रेनर मुझसे वर्कआउट करवाता है। आप सभी को भी रोज कम से कम आधा घंटा व्यायाम और प्राणायाम करना चाहिए।’

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4 लोग एक स्कूटर पर बैठकर जाते थे, नंबर प्लेट पर हाथ रखते थे
राजनीतिक सफर के शुरुआती यादों को ताजा करते हुए उन्होंने कहा, 'मेरा जीवन पहले बहुत अनियमित था। हम भावुक होकर साइकिल और स्कूटर से पार्टी के काम के लिए निकल पड़ते थे।

उस समय हमारी पहचान के एक व्यक्ति के पास एम्बेसडर कार थी। जब भी पार्टी के बड़े नेता एयरपोर्ट आते थे, तो उनके आने-जाने की व्यवस्था हो सके, इसलिए हमने उस कार मालिक को ही पार्टी अध्यक्ष बना दिया था।' उन्होंने फिर मुस्कुराते हुए कहा, 'मेरे पास एक लूना थी, जो 'कू-कू' की आवाज करती थी। उस पर दो लोग बैठकर जाते थे। बाद में विजय स्कूटर आया, जिस पर हम चार-चार लोग बैठ जाते थे। पुलिस से बचने के लिए हम पीछे बैठे-बैठे नंबर प्लेट पर हाथ रख लेते थे।'

आदिवासी इलाकों में कोई गांव अंधेरे में न रहे
कार्यक्रम में गडकरी ने 'एकलव्य एकल विद्यालय' संस्था के सामाजिक कार्यों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के दूरदराज के आदिवासी इलाकों में शिक्षा का दीप जलाना जरूरी है।

गडकरी के मुताबिक, ‘एक दिन यह अभियान इतना बड़ा बनेगा कि राज्य का कोई भी आदिवासी गांव अंधेरे में नहीं रहेगा। हर घर में शिक्षा का उजाला पहुंचेगा।’

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महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति में हलचल
गडकरी के इस बयान को हाल ही में चल रही उन चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, जिनमें देवेंद्र फडणवीस के केंद्रीय राजनीति में जाने की संभावना जताई जा रही है। इसी कारण गडकरी का 'नई पीढ़ी को जिम्मेदारी' वाला बयान अहम माना जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यह बयान बीजेपी में बड़े संगठनात्मक बदलाव के कुछ दिनों बाद आया है. पिछले हफ्ते ही पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम बनी है. खास बात तो ये है कि 65 सदस्यों वाली इस टीम में 51 नए चेहरे हैं. इसे पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा था. 2015 में अमित शाह के बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद इसे पार्टी के स्तर पर हुए सबसे बड़े बदलाव के रूप में दर्शाया जा रहा है.  और अब नितिन गडकरी का यह बयान आगे और बड़े बदलाव का इशारा कर रहा है। 

बीजेपी संगठन में हुए इस बड़े बदलाव के बाद अब प्रधानमंत्री मोदी की केंद्रीय कैबिनेट में भी फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। 

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