प्रेशर में Air India: रिकॉर्ड 22,000 करोड़ के घाटे के बाद अब चाहिए 1.5 अरब डॉलर की फंडिंग

 नई दिल्ली
एअर इंडिया ने अपने मालिकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब $1.5 बिलियन (₹14,355) की नई इक्विटी फंडिंग मांगी है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत करने वाले दो सूत्रों के मुताबिक, एयरलाइन को इस पूंजी की तत्काल जरूरत है. हालांकि, प्रस्तावित फंडिंग एकमुश्त देने के बजाय किस्तों में भी दी जा सकती है. फिलहाल इस प्रस्ताव पर बातचीत जारी है और टाटा संस या सिंगापुर एयरलाइंस की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। 

एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में संयुक्त रूप से $2.33 बिलियन (₹22,180) का घाटा दर्ज किया है. यह दोनों एयरलाइंस का रिकॉर्ड वार्षिक नुकसान बताया जा रहा है. पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यह घाटा दोगुने से भी ज्यादा रहा. एअर इंडिया के भारी नुकसान का असर उसकी शेयरहोल्डर सिंगापुर एयरलाइंस के मुनाफे पर भी पड़ा है. ऐसे में नई इक्विटी की मांग एयरलाइन के बड़े ट्रांसफॉर्मेशन और टर्नअराउंड प्लान के सामने मौजूद वित्तीय दबाव को दिखाती है। 

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टाटा द्वारा अधिग्रहण के बाद सबसे बड़ी फंडिंग

टाटा ग्रुप द्वारा 2022 में अधिग्रहण करने के बाद से यह एअर इंडिया की सबसे बड़ी पब्लिक फंडिंग की डिमांड है. एयरलाइन पहले सरकार के स्वामित्व में थी. टाटा ग्रुप ने इसे फिर से मजबूत बनाने के लिए बड़े स्तर पर बदलाव की योजना बनाई थी, जिसमें पुराने विमानों का रिफर्बिशमेंट, नए विमान शामिल करना, नेटवर्क विस्तार और संचालन में सुधार जैसे कदम शामिल हैं. हालांकि, भारी नुकसान और बढ़ती पूंजी जरूरतों के बीच अब इस टर्नअराउंड प्लान पर वित्तीय दबाव बढ़ता दिख रहा है। 

एअर इंडिया को तुरंत चाहिए पैसा
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, दो सूत्रों ने बताया कि एअर इंडिया यह रकम नई इक्विटी के तौर पर चाहती है. एक सूत्र के अनुसार, एयरलाइन को पूंजी की तत्काल जरूरत है, हालांकि निवेश को चरणबद्ध तरीके से भी किया जा सकता है. इस निवेश में सिंगापुर एयरलाइंस को भी अपनी हिस्सेदारी के अनुपात में योगदान करना होगा. सिंगापुर एयरलाइंस की एअर इंडिया में करीब 25 फीसदी हिस्सेदारी है। 

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फंडिंग पर अभी कोई फैसला नहीं
सूत्रों के मुताबिक, फंडिंग को लेकर बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. दोनों सूत्रों ने पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर जानकारी दी, क्योंकि वे इस मामले पर सार्वजनिक रूप से बोलने के लिए अधिकृत नहीं थे। 

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के सवालों पर एअर इंडिया और टाटा संस ने कोई टिप्पणी नहीं की. सिंगापुर एयरलाइंस ने कहा कि वह टाटा संस के साथ मिलकर एअर इंडिया के ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम को सपोर्ट कर रही है. हालांकि, कंपनी ने एअर इंडिया की वित्तीय स्थिति पर टिप्पणी करने से इनकार किया

एयरलाइन को कई मोर्चों पर झटके
एअर इंडिया के टर्नअराउंड के बीच एयरलाइन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. भारतीय एयरलाइंस के लिए पाकिस्तान के एयरस्पेस पर लगी पाबंदी से उसके परिचालन पर असर पड़ा. इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने एयरलाइन के इंटरनेशनल नेटवर्क को प्रभावित किया. पिछले साल हुए घातक विमान हादसे का असर भी एअर इंडिया को झेलना पड़ा, जिसमें 260 लोगों की जान गई थी. इन घटनाओं ने एयरलाइन के संचालन और वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाला है। 

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टर्नअराउंड में लग सकते हैं 10 साल
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन पहले कह चुके हैं कि एअर इंडिया के टर्नअराउंड में 10 साल तक का समय लग सकता है. उनके मुताबिक, एयरलाइन को सप्लाई चेन की बाधाओं के साथ-साथ पुराने सिस्टम, कार्य संस्कृति और फ्लीट में बड़े बदलाव की जरूरत है. इस बीच लागत घटाने की कोशिशें भी जारी हैं. रॉयटर्स ने इस साल रिपोर्ट किया था कि टाटा ग्रुप एयरबस और बोइंग से ऑर्डर किए गए सैकड़ों विमानों की डिलीवरी को टालने पर विचार कर रहा है, ताकि खर्च को नियंत्रित किया जा सके। 

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