रक्षाबंधन पर राखी बांधने का सबसे शुभ समय क्या? 9:48 के बाद भी कर सकते हैं भाई की कलाई पर राखी

रक्षाबंधन का त्योहार आज 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इस बार राखी बांधने के शुभ मुहूर्त को लेकर खास सावधानी रखने की जरूरत है, क्योंकि श्रावण पूर्णिमा तिथि आज सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर समाप्त हो रही है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार भाई की कलाई पर राखी बांधने का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक है। यानी बहनों के पास मुख्य मुहूर्त में राखी बांधने के लिए करीब 3 घंटे 51 मिनट का समय है।

9:48 बजे तक राखी नहीं बांध पाए तो कब बांधें?
यह सवाल आज कई लोगों के मन में है। अगर किसी वजह से सुबह 9:48 बजे तक राखी नहीं बांध पाए, तो इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे दिन राखी बांधना मना हो गया। ऐसी स्थिति में राहुकाल से बचते हुए दोपहर के बाद राखी बांधी जा सकती है। पंचांग में रक्षाबंधन पर दोपहर के अपराह्न काल को राखी बांधने के लिए उपयुक्त माना गया है। इसलिए अगर सुबह का मुख्य मुहूर्त छूट जाए तो राहुकाल खत्म होने के बाद दोपहर में राखी बांध सकते हैं। पंचांग के अनुसार राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। इसलिए इस अवधि में राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है।

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सुबह 5:57 से 9:48 बजे: राखी बांधने का मुख्य शुभ मुहूर्त।
9:48 बजे के बाद: अगर मुख्य मुहूर्त छूट गया है तो राखी बांध सकते हैं, लेकिन राहुकाल से बचें।
सुबह 10:46 से दोपहर 12:22 बजे: राहुकाल, इस दौरान राखी बांधने से बचें।
दोपहर 12:22 बजे के बाद: राहुकाल खत्म होने के बाद राखी बांधी जा सकती है।

क्या 9:48 के बाद राखी बांधना अशुभ है?
नहीं, ऐसा सीधा कहना सही नहीं होगा। 9:48 बजे मुख्य शुभ मुहूर्त और पूर्णिमा तिथि समाप्त होती है, इसलिए इस समय से पहले राखी बांधना प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन यदि किसी मजबूरी के कारण ऐसा नहीं हो पाया तो बाद में भी राखी बांधी जा सकती है। इस स्थिति में खास तौर पर राहुकाल से बचना चाहिए। यानी सुबह 9:48 बजे का मुहूर्त निकल जाने पर तुरंत राखी बांधने के बजाय राहुकाल की समाप्ति का इंतजार किया जा सकता है।

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अभिजीत मुहूर्त में बांध सकते हैं राखी?
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा राहुकाल में आ रहा है। राहुकाल की समाप्तिक के बाद ही राखी बांधें।

राखी बांधते समय किन समयों से बचें?
रक्षाबंधन पर धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा और राहुकाल में राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है। इस साल 28 अगस्त की सुबह राखी के मुख्य मुहूर्त में भद्रा की बाधा नहीं है। भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुकी है। इसलिए सुबह का 5:57 से 9:48 बजे तक का समय सबसे महत्वपूर्ण है। अगर यह समय किसी कारण छूट जाए तो राहुकाल में राखी न बांधकर उसके बाद का उपयुक्त समय चुना जा सकता है।

राखी बांधने की सही विधि क्या है?
राखी बांधने से पहले भाई को पूजा की चौकी पर बैठाया जाता है। इसके बाद बहन भाई के माथे पर रोली या कुमकुम से तिलक लगाती है, अक्षत लगाती है और फिर भाई की कलाई पर राखी बांधती है। इसके बाद आरती कर मिठाई खिलाई जाती है। भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसके सुखी और सुरक्षित जीवन की कामना करता है। धार्मिक मान्यता में भाई को राखी बांधते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाने की बात भी कही जाती है। हालांकि अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में विधि में अंतर हो सकता है।

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इस बार चंद्र ग्रहण का क्या असर?
28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी हो रहा है। लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां ग्रहण का सूतक मानने की बाध्यता नहीं मानी जाती। इसलिए भारत में राखी बांधने के मुख्य मुहूर्त पर ग्रहण की वजह से कोई रोक नहीं है।

 

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