भोपाल मेट्रो के 500 मीटर दायरे में TDR का नया खेल, बढ़ेगी निर्माण क्षमता; रहवासियों की चिंता बढ़ी

भोपाल 

भोपाल में मेट्रो रेल परियोजना के आसपास विकास व्यवस्था को लेकर एक अहम बदलाव की तैयारी चल रही है। भोपाल विकास योजना 2005 के तहत मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500-500 मीटर के क्षेत्र को ‘रीसिविंग एरिया’ के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया है। इस व्यवस्था का सीधा संबंध हस्तांतरणीय विकास अधिकार यानी TDR से है। प्रस्ताव को लेकर आपत्तियां और चिंताएं सामने आई हैं, क्योंकि इसके लागू होने से मेट्रो कॉरिडोर के आसपास निर्माण क्षमता, व्यावसायिक गतिविधियों और जमीन-मकान के मूल्य पर असर पड़ सकता है।

मेट्रो के आसपास होगा रीसिविंग एरिया विकसित
प्रस्ताव के अनुसार मेट्रो लाइन के दोनों तरफ 500 मीटर तक के क्षेत्र को रीसिविंग एरिया के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके तहत संबंधित क्षेत्रों में अतिरिक्त विकास अधिकार का उपयोग करके भवन निर्माण की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। मौजूदा विकास व्यवस्था की तुलना में अतिरिक्त एफएआर उपलब्ध होने से मेट्रो के आसपास अधिक घनत्व वाला आवासीय और व्यावसायिक विकास संभव होगा। भोपाल की विकास योजना में भी मेट्रो के दोनों ओर 500 मीटर क्षेत्र को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट से जोड़ने की अवधारणा पहले से मौजूद है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मेट्रो के आसपास ऐसी शहरी संरचना तैयार करना है, जहां आवास, कारोबार और अन्य सुविधाएं सार्वजनिक परिवहन के करीब विकसित हों। इससे मेट्रो का उपयोग बढ़ाने और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत भोपाल मेट्रो परियोजना में भी TDR और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को परियोजना से जुड़े मूल्य संवर्धन और शहरी विकास के साधन के रूप में शामिल किया गया था।

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रहवासियों के लिए चिंता का कारण
हालांकि, प्रस्तावित बदलाव को लेकर रहवासियों की चिंताएं भी सामने आ रही हैं। मेट्रो कॉरिडोर के आसपास निर्माण की अनुमति और एफएआर बढ़ने से जमीन तथा संपत्तियों की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसका असर उन मध्यम और निम्न-मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ने की आशंका है, जो इन क्षेत्रों में पहले से रह रहे हैं। अधिक निर्माण क्षमता के कारण क्षेत्र में आबादी और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने पर यातायात, पार्किंग और बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहेगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अतिरिक्त विकास अधिकार खरीदने के बाद निर्माण क्षमता में कई गुना वृद्धि संभव होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा एफएआर की तुलना में यह क्षमता तीन से पांच गुना तक पहुंच सकती है। ऐसे में मेट्रो स्टेशनों के आसपास ऊंची इमारतों, अधिक आवासीय इकाइयों और व्यावसायिक परियोजनाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है।

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TDR व्यवस्था नई नहीं
भोपाल में TDR की अवधारणा नई नहीं है। मध्यप्रदेश में हस्तांतरणीय विकास अधिकारों के लिए 2018 में नियम बनाए गए थे और भोपाल मेट्रो परियोजना के लिए उत्पादन क्षेत्र तथा TDR व्यवस्था से संबंधित अधिसूचनाएं पहले भी जारी की जा चुकी हैं। राज्य के नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के रिकॉर्ड में भोपाल मेट्रो के लिए TDR नियमों के तहत उत्पादन क्षेत्र अधिसूचित किए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख मौजूद है। मेट्रो परियोजना से जुड़े भूमि और पुनर्वासन के मामलों पर भी प्रशासन की प्रक्रिया जारी है। जिला भोपाल की आधिकारिक वेबसाइट पर अगस्त 2026 में ऑरेंज लाइन के स्वीकृत मेट्रो मार्ग से जुड़े भूमि अधिग्रहण संबंधी नोटिस प्रकाशित किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि परियोजना के विभिन्न हिस्सों में भूमि और विकास से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाएं अभी भी आगे बढ़ रही हैं।

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आपत्तियों और सुझावों पर हो सकती है सुनवाई
अब प्रस्तावित रीसिविंग एरिया को लेकर नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में आपत्तियों और सुझावों पर सुनवाई की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार सुनवाई के बाद प्राप्त आपत्तियों का निराकरण किया जाएगा और उसके आधार पर मास्टर प्लान में संशोधन का अधिसूचना प्रस्ताव आगे बढ़ सकता है। यदि संशोधन लागू होता है तो भोपाल मेट्रो कॉरिडोर के आसपास भविष्य के निर्माण और भूमि उपयोग की तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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