MP-UP की कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा बूस्ट, जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे से जुड़ेंगे सतना-रीवा-प्रयागराज

जबलपुर
 मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे महाकौशल से विंध्य और उत्तर प्रदेश तक तेज कनेक्टिविटी देने वाला अहम प्रोजेक्ट होगा। इसके बनने के बाद जबलपुर से वाराणसी का सफर करीब 5 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। यह कॉरिडोर कटनी, मैहर, सतना, रीवा और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों को भी बेहतर तरीके से जोड़ेगा।

5 घंटे में पूरा होगा जबलपुर-वाराणसी का सफर
फिलहाल जबलपुर से वाराणसी की दूरी करीब 460 से 480 किलोमीटर है। मौजूदा 2 लेन मार्ग से सफर करने में लगभग 10 से 12 घंटे लग जाते हैं। नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद 4 लेन हाई-स्पीड रास्ता उपलब्ध होगा। वाहनों की रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने की उम्मीद है।

ये भी पढ़ें :  दमोह कलेक्टर ने प्रति सोमवार उद्योगपतियों के लिए 2 घंटे का समय तय किया

इससे यात्रा के समय में करीब 5 से 6 घंटे की कमी आ सकती है। यानी जबलपुर से वाराणसी का सफर करीब 5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इससे धार्मिक यात्रा करने वाले यात्रियों को भी काफी सुविधा मिलेगी।

ये शहर होंगे सीधे कनेक्ट
जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे के जरिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहर बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। इनमें जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा, प्रयागराज और वाराणसी शामिल हैं। यह रूट मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र से शुरू होकर विंध्य क्षेत्र के रास्ते उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल तक पहुंचेगा। कॉरिडोर रीवा-सतना बेल्ट के साथ उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और प्रयागराज के बाहरी हिस्सों को टच करते हुए वाराणसी रिंग रोड से जुड़ेगा।

ये भी पढ़ें :  रायपुर : लघु उद्योगों और एमएसएमई को मजबूत बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का रोडमैप तैयार कर रही सरकार : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

MP-UP की नई लाइफलाइन बनेगा कॉरिडोर
जबलपुर-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर को रणनीतिक रूप से तैयार किया जा रहा है। इसके जरिए महाकौशल, विंध्य और पूर्वांचल के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। व्यापार के साथ धार्मिक पर्यटन को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। जबलपुर सीधे प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ जाएगा।

करीब 30 हजार करोड़ की लागत
जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे वाराणसी-विशाखापट्टनम कॉरिडोर का हिस्सा है। यह आधुनिक, ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल हाईवे नेटवर्क का हिस्सा होगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 30,000 करोड़ रुपये बताई गई है।

ये भी पढ़ें :  मुख्यमंत्री सीतागांव ने 132 केवी सब स्टेशन, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उन्नयन, हायर सेकेंडरी स्कूल उन्नयन की घोषणाएं

DPR और सर्वे का काम अंतिम दौर में
इस अहम प्रोजेक्ट को लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक मंजूरियों और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और तकनीकी दल ने एलाइनमेंट को लेकर शुरुआती सर्वेक्षण भी शुरू कर दिया है।

प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अहम चुनौती है, क्योंकि एक्सप्रेसवे दोनों राज्यों के कई जिलों से होकर गुजरेगा। माना जा रहा है कि अगले साल तक इसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी हो सकती है।

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment