केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, सरकार ने बदले इस स्कीम के नियम

नई दिल्ली

अगर केंद्रीय कर्मचारी हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। आइए डिटेल में जानतें है कि क्या कुछ बदल गया है।

क्या बदला है नियम?
सरकार ने उस भौगोलिक शर्त को हटाने का फैसला किया है जो पहले केंद्र सरकार के मौजूदा कर्मचारियों के लिए उनके रहने या पोस्टिंग की जगह के आधार पर CGHS की पात्रता को सीमित करती थी। जानकार बताते हैं कि पहले की भौगोलिक पाबंदियों ने CGHS कवरेज के दायरे से बाहर रहने या पोस्टेड कर्मचारियों के लिए मुश्किलें और परेशानियां पैदा कर दी थीं। बदले हुए नियम ऐसे हालात में योग्य कर्मचारियों को CGHS चुनने की इजाजत देते हैं, बशर्ते वे दूसरी शर्तों को पूरा करें और तय योगदान का भुगतान करें। एक बार यह विकल्प चुनने के बाद इसे बदला नहीं जा सकता। CGHS चुनने वाले योग्य कर्मचारियों को यह अंडरटेकिंग भी देनी होगी कि वे या उनके योग्य परिवार के सदस्य CGHS और सेंट्रल सर्विसेज (मेडिकल अटेंडेंस) रूल्स, 1944, दोनों के तहत मेडिकल फायदों का दावा नहीं करेंगे।

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जो कर्मचारी पहले से CGHS के कवरेज वाले इलाके में रह रहे हैं या वहां तैनात हैं, उनके लिए CGHS कवरेज अनिवार्य रहेगा। ऐसे कर्मचारी इसके बदले CS(MA) नियमों के तहत मिलने वाली सुविधाओं का विकल्प नहीं चुन सकेंगे।

गलत जानकारी पर होगी कार्रवाई
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई कर्मचारी गलत या भ्रामक जानकारी देकर मेडिकल लाभ लेता है, तो उसके खिलाफ गंभीर कार्रवाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ गलत तरीके से लिए गए लाभ की वसूली भी की जा सकती है।

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CGHS क्या है?
CGHS की बात करें तो केंद्र सरकार के मौजूदा और रिटायर्ड कर्मचारियों और उनके योग्य परिवार के सदस्यों के लिए एक सरकारी हेल्थकेयर प्रोग्राम है। इसे 1 जुलाई 1954 को दिल्ली में शुरू किया गया था, जिसका मुख्य मकसद मेडिकल देखभाल देना और आउटपेशेंट दवाओं के लिए रीइंबर्समेंट का दावा करने में कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों को दूर करना था।

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पिछले कुछ दशकों में, CGHS का विस्तार दिल्ली से आगे कई शहरों तक हुआ है और अब यह वेलनेस सेंटर, पॉलीक्लिनिक, लेबोरेटरी और एम्पैनल्ड अस्पतालों के जरिए सेवाएं देता है। इसके अलावा, इसके दायरे में योग्य पेंशनभोगी और लाभार्थियों की कुछ अन्य श्रेणियां भी शामिल हो गई हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की 2024-25 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, CGHS 81 शहरों तक फैल गया था और लगभग 46.87 लाख लाभार्थियों को सेवाएं दे रहा था।

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