भोपाल
पहला दिन: राष्ट्रीय संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं, अभिभावकों व प्राध्यापकों ने की सहभागिता
दिव्यांगजनों और विद्यार्थियों को समावेशी खेलों से जोड़ने की पहल स्पेशल ओलंपिक भारत मध्यप्रदेश द्वारा मंगलवार को जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी, भोपाल में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी का मुख्य विषय “समावेशी खेल, यूनिफाइड स्पोर्ट्स, दिव्यांगजन अधिकार एवं अनुकूलित शारीरिक शिक्षा—खेलों में सुगमता एवं समान अवसर को सशक्त बनाना” रहा।

संगोष्ठी के दौरान समावेशी खेल, यूनिफाइड स्पोर्ट्स, दिव्यांगजन अधिकार एवं अनुकूलित शारीरिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम में लगभग 200 छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं शिक्षकों ने सहभागिता की।
बच्चों को खेलों से जोड़ना उनके विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: दीपांकर
संगोष्ठी के पहले सत्र में उपस्थित अतिथि दीपांकर बैनर्जी ने स्पेशल ओलंपिक भारत के कार्यों, उपलब्धियों एवं समावेशी खेलों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस संबंध में बताया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को खेल गतिविधियों से जोड़ना उनके विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
खेलों के माध्यम से बच्चों में शारीरिक क्षमता के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता, आत्मविश्वास, अनुशासन एवं टीम भावना का विकास होता है। संगोष्ठी के प्रथम दिवस के समापन सत्र में मध्यप्रदेश दिव्यांगजन आयुक्त अजय … ने दिव्यांगजनों के अधिकारों एवं उनसे संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों तथा दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए समान अवसर, सुगम्यता एवं अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न सत्रों में दिव्यांगजनों एवं विद्यार्थियों को खेलों से जोड़ने तथा उनके विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी दी गई।
अतिथियों ने किया संगोष्ठी का शुभारंभ
संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित NIMHR सीहोर के निदेशक अखिलेश शुक्ला, विशिष्ट अतिथि जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी के कुलपति निलंजन चट्टोपाध्याय, स्पेशल ओलंपिक भारत मध्यप्रदेश के क्षेत्रीय निदेशक दीपांकर बैनर्जी, फिजिकल एजुकेशन विभाग के एचओडी हर्षवर्धन दुबे सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत किया।
यह राष्ट्रीय संगोष्ठी समावेशी खेलों को बढ़ावा देने, दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा विद्यार्थियों एवं भावी खेल प्रशिक्षकों को संवेदनशील एवं सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
