मुस्लिम पति की संपत्ति में हिंदू पत्नी का हक? कोर्ट में पहुंचा मामला

 जबलपुर
 मध्य प्रदेश में इंदौर की एक हिंदू युवती और जबलपुर के मुस्लिम युवक हसनैन अंसारी के अंतरधार्मिक विवाह से जुड़ा एक विवाद विशेष विवाह अधिनियम की संवैधानिकता के प्रश्न तक पहुंच गया है।

युवती के पिता और विश्व हिंदू परिषद के धर्म प्रसार विभाग के पदाधिकारी दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ में विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा चार की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए याचिका में मुस्लिम पति की संपत्ति में हिंदू पत्नी के उत्तराधिकार के अधिकार और विवाह के बाद उत्पन्न होने वाले कानूनी प्रश्न उठाए हैं।

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याचिकाकर्ताओं का मुख्य प्रश्न है कि विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत मुस्लिम युवक और हिंदू युवती का विवाह होने के बाद हिंदू पत्नी को मुस्लिम पति की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार किस कानून के तहत मिलेगा। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है।

क्या है पूरा मामला?
प्रकरण के अनुसार, युवती और हसनैन अंसारी ने विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाह के लिए आवेदन किया था। इस पर हाई कोर्ट की एकल पीठ ने विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाह की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे, लेकिन नवंबर 2024 में युवती के पिता की याचिका पर हाई कोर्ट की युगलपीठ ने विवाह प्रक्रिया आगे बढ़ाने के एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी थी।

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अब युवती के पिता की ओर से दायर नई याचिका में इस प्रकरण का दायरा केवल विवाह प्रक्रिया के विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विशेष विवाह अधिनियम की धारा-चार के अंतर्गत हिंदू युवती और मुस्लिम युवक के विवाह पश्चात महिला व उसके बच्चों को मिलने वाले अधिकारों को सुनिश्चित किए जाने पर केंद्रित हो गया है। केंद्र सरकार का जवाब मिलने के बाद हाई कोर्ट आगे की सुनवाई करेगा।

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याचिका में यह हैं प्रश्न?
युवती के पिता की ओर से विशेष विवाह अधिनियम की धारा -चार को चुनौती देते हुए अंतरधार्मिक विवाह की वैधानिकता और उसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले उत्तराधिकार के अधिकारों पर सवाल उठाया गया है।

याचिका में विशेष विवाह अधिनियम और मुस्लिम पर्सनल ला के बीच उत्पन्न होने वाली कानूनी स्थिति का भी मुद्दा उठाया गया है। ऐसे मामले में पत्नी और संतान के उत्तराधिकार तथा व्यक्तिगत कानून से जुड़े प्रश्नों पर भी न्यायालय से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।

 

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