आधुनिक तकनीक, संवेदनशीलता और प्रो-एक्टिव पुलिसिंग: मध्यप्रदेश पुलिस के नवाचार एवं कानून-व्यवस्था सुदृढ़ीकरण के प्रयास

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस राज्य में शांति, सौहार्द और कानून-व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए "देश भक्ति – जन सेवा" के मूलमंत्र के साथ कार्य कर रही है। विगत समय में प्रदेश के विभिन्न जिलों में उत्पन्न हुई अत्यधिक संवेदनशील और जटिल परिस्थितियों में मध्य प्रदेश पुलिस ने बिना किसी अनावश्यक बल प्रयोग या लाठीचार्ज के, केवल "पहले संवाद, फिर सुरक्षा" की सूझबूझ भरी रणनीति और अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था के बल पर शांति स्थापित कर मिसाल कायम की है।

​जिलावार कानून-व्यवस्था के उत्कृष्ट उदाहरण

​1. धार: संवेदनशीलता, संवाद और त्रिस्तरीय सुरक्षा का प्रभावी मॉडल

​साम्प्रदायिक दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील धार जिले में पुलिस एवं प्रशासन ने कानूनी आदेशों के पालन और सौहार्द बनाए रखने में अभूतपूर्व तालमेल का प्रदर्शन किया। जिले मेंपूजन व नमाज शांतिपूर्वक संपन्न कराई गई। 23 जनवरी को  हजारों लोगों की वाग्देवी शोभायात्रा तथा दिनभर में श्रद्धालुओं द्वारा किए गए दर्शन-हवन के दौरान 6 सेक्टरों और 7 जोन में पुलिस बल तथा  आरएएफ (RAF) प्लाटून की तैनाती कर चाक-चौबंद सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

​प्रतिबंधात्मक आदेश, सतत शांति समिति बैठकें, ड्रोन व सीसीटीवी निगरानी और आरएएफ/एसटीएफ/क्यूआरएफ के फ्लैग मार्च से माहौल पूरी तरह नियंत्रित रहा।

​कानून-व्यवस्था के दृष्टिगत अनुमति निरस्त होने के बावजूद रैली निकालने की जिद पर अड़े असामाजिक तत्वों के विरुद्ध पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। मजबूत बैरिकेडिंग और ड्रोन निगरानी के साथ उल्लंघन पर व्यक्तियों की वैधानिक गिरफ्तारी कर शहर में शांति बनाए रखी।

​​2. भोपाल पुलिस कमिश्नरेट: टकराव टालकर किसान आंदोलन में संवाद से समाधान

​मूंग खरीदी और खाद वितरण को लेकर नर्मदापुरम व आसपास के हजारों किसानों द्वारा बैरिकेड्स तोड़ने और राजमार्ग पर 6 घंटे तक चक्काजाम करने की गंभीर स्थिति में भोपाल पुलिस ने लाठीचार्ज या बल प्रयोग से परहेज किया। पुलिस कमिश्नर व प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को रोके रखा, जिससे आधी रात को मांगें पूरी होने के साथ चक्काजाम बिना किसी हिंसा के शांतिपूर्वक समाप्त हुआ।

गोविंदपुरा क्षेत्र में मारपीट की घटना के बाद शहर के कुछ संवेदनशील इलाकों में विरोध प्रदर्शन और तनाव फैल गया, जहां कुछ जगहों पर पथराव की घटनाएं भी हुईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस नेत्वरित कार्रवाई की, आरोपियों को गिरफ्तार कियाऔर संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस सुरक्षा बल तैनात कर शांति व्यवस्था बहाल की।

3. खंडवा एवं खरगोन जिले: अग्रिम समन्वय से रूट विवादों का खात्मा

​त्योहारों के दौरान जुलूसों के मार्गों और समय को लेकर उत्पन्न होने वाले तनाव को पुलिस ने त्‍योहारों के पूर्व "शांति समिति की बैठकें" आयोजित कर हल किया। दोनों पक्षों के धर्मगुरुओं की आपसी सहमति से रूट व समय निर्धारण करवाकर संभावित झड़पों को शून्य किया गया।

​4. राजगढ़ जिला (ब्यावरा एवं बोड़ा): मध्यस्थता से लिखित समझौता

​ग्रामीण इलाकों में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर और रात्रिकालीन आयोजनों को लेकर उभरे विवाद में पुलिस ने थाना परिसरों में आपातकालीन बैठकें आयोजित कीं। कानून और भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए पुलिस की मध्यस्थता में दोनों पक्षों से समय-सीमा और ध्वनि नियंत्रण का लिखित समझौता कराया गया।

इसी प्रकार मध्यप्रदेश पुलिस ने "देशभक्ति-जनसेवा" के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, अपराध नियंत्रण और आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़कर अब म.प्र. पुलिस स्मार्ट, तकनीकी रूप से सक्षम और जन-संवेदनशील पुलिसिंग को प्राथमिकता दे रही है।

ये भी पढ़ें :  ताज पहनकर मिस इंडिया वर्ल्ड पहुंची महाकाल के सामने, मर्यादा पर छिड़ा विवाद, पुजारी नाराज

  1. डिजिटल नवाचार एवं पारदर्शी नागरिक सेवाएं

नागरिकों को बिना किसी झंझट के पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल माध्यमों को सशक्त बनाया गया है:

ई-जीरो एफआईआर (E-Zero FIR) के दायरे का विस्तार: नागरिकों की सुविधा के लिए चोरी या संपत्ति संबंधी नुकसान की ऑनलाइन रिपोर्टिंग सीमा, जो पहले ₹1,00,000 थी, उसे घटाकर अब ₹25,000 कर दिया गया है। इससे छोटे अपराधों और संपत्ति चोरी की स्थिति में आम नागरिकों को त्वरित राहत और ऑनलाइन एफआईआर की सुविधा मिल रही है।

ई-रक्षक ऐप (e-Rakshak Mobile App):राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB, भोपाल) द्वारा विकसित यह स्मार्ट-पुलिसिंग ऐप सुरक्षा व्यवस्था संभालने और नागरिकों तक आपातकालीन सेवाएं पहुँचाने में तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है।

सिटीजन पोर्टल (Citizen Portal):चरित्र सत्यापन (Character Verification), किरायेदार/कर्मचारी सत्यापन और ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने जैसी बहुमूल्य सेवाएं घर बैठे उपलब्ध हो रही हैं।

क्यूआर कोड आधारित शिकायत व्यवस्था: भीड़भाड़ वाले बाजारों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थलों पर क्यूआर कोड स्थापित किए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर नागरिक बिना थाने जाए गोपनीय व सीधी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

डायल-112 व फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल (FRV): किसी भी आपात स्थिति में सूचना मिलते ही न्यूनतम रिस्पांस टाइम में सहायता उपलब्ध कराने के लिए डायल-112 को आधुनिक जीपीएस व एफआरवी नेटवर्क से लैस किया गया है।

अपराधियों का डिजिटल रिकॉर्ड: एक क्लिक पर संदिग्धों का क्रिमिनल बैकग्राउंड, हिस्ट्री शीट और पूर्व रिकॉर्ड की जांच।

​फेशियल रिकग्निशन व वाहन ट्रैकिंग: चेहरे की पहचान कर संदिग्धों को चिह्नित करना तथा चोरी/लावारिस वाहनों और संपत्तियों को तुरंत ट्रैक करना।

​डिजिटल सम्मन/वारंट: समन व वारंट की तामीली को पारदर्शी और त्वरित बनाना।

2. महिला एवं बाल सुरक्षा: संवेदनशीलता और सख्त निगरानी

महिला, बालिकाओं एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा मध्यप्रदेश पुलिस की सर्वोच्च ​“शी-शक्ति” (She-Shakti) अभियान: भोपाल पुलिस कमिश्नरेट द्वारा महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत महिला पुलिसकर्मियों द्वारा शहर भर में वाहन रैलियां निकालकर जागरूकता फैलाई जा रही है।

​हॉटस्पॉट व संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष पेट्रोलिंग: प्रमुख बाजारों, पूजा स्थलों, मेलों, गरबा/डांडिया पंडालों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में प्रत्येक थाने से हॉटस्पॉट चिह्नित कर आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक की महिला पुलिस पेट्रोलिंग पार्टियां तैनात की गई हैं।

​त्वरित कार्रवाई व उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग: छेड़छाड़, फब्तियां कसने और पीछा करने जैसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिएअतिरिक्त/सहायक पुलिस आयुक्त (महिला सुरक्षा) स्तर के अधिकारी इसकी निगरानी कर रहे हैं।

​ऊर्जा डेस्क (Urja Desk):प्रदेश के सभी प्रमुख थानों में महिला केंद्रित शिकायतों की सुनवाई और त्वरित निस्तारण के लिए समर्पित महिला डेस्क सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

हेल्पलाइन नेटवर्क:

महिला हेल्पलाइन (1090 / 181): संकटग्रस्त महिलाओं को विधिक, चिकित्सीय एवं पुलिस सहायता।

ये भी पढ़ें :  इंदौर सराफा चौपाटी सिमटने लगी, दुकानों की संख्या पर विवाद

चाईल्ड हेल्पलाइन (1098): बाल अपराधों की रोकथाम और गुमशुदा/मुसीबत में फंसे बच्चों के त्वरित रेस्क्यू के लिए 24×7 सक्रिय।

आपातकालीन सेवा: डायल 112 (एकीकृत आपातकालीन पुलिस सेवा)

​वित्तीय साइबर फ्रॉड: राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930

​मादक पदार्थ रोकथाम: नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 7049100785

​विशेष हेल्पलाइन्स: महिला हेल्पलाइन (1090) और चाइल्ड हेल्पलाइन (1098)

3. साइबर सुरक्षा एवं नशामुक्ति के विरुद्ध निर्णायक प्रहार

बदलते अपराध परिदृश्य में साइबर फ्रॉड और मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रहार करने के लिए दोहरे स्तर पर रणनीति लागू की गई है:

साइबर हेल्पलाइन 1930 एवं ‘सेफ क्लिक’ अभियान : ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में गोल्डन ऑवर (Golden Hour) के भीतर राशि ब्लॉक कराने के लिए हेल्पलाइन 1930 लगातार सक्रिय है।

नारकोटिक्स हेल्पलाइन (7049100785) एवं ‘ऑपरेशन प्रहार’: मादक पदार्थों के अवैध कारोबार की गुप्त सूचना देने हेतु नारकोटिक्स शाखा का मोबाइल नंबर 7049100785 सार्वजनिक किया गया है।

‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत दुर्गम एवं शैडो (नो-नेटवर्क) क्षेत्रों में ड्रोन सर्विलांस से अवैध फसलों और करोड़ों रुपये के ड्रग्स (स्मैक, गांजा, एमडी) पर बड़ी कानूनी कार्रवाइयां की जा रही हैं।

4. हवाई निगरानी, आधुनिक फॉरेंसिक व तकनीक

तकनीकी आधुनिकीकरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पुलिस देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हुई है।

PASTEC (पुलिस एरियल सिस्टम्स एण्ड टेक्नॉलाजी सेंटर), इंदौर:

पुलिस रेडियो ट्रेनिंग स्कूल (PRTS), इंदौर के परिसर में मध्यप्रदेश का प्रथम एवं देश का दूसरा ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर 'PASTEC' प्रारंभ किया गया है। देशभर के संस्थानों का अध्ययन कर विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया। कर्नाटक पुलिस (बेंगलुरु) के बाद अपनी खुद की ड्रोन प्रशिक्षण संस्था स्थापित करने वाला मध्यप्रदेश देश का दूसरा राज्य बना है।

ऑपरेशन त्रिनेत्रम (CCTV सर्विलांस – देवास मॉडल): देवास पुलिस द्वारा जनसहभागिता और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सहयोग से शुरू किया गया 'ऑपरेशन त्रिनेत्रम' शहर के हर कोने को हाई-डेफिनिशन कैमरों से जोड़कर अपराध नियंत्रण और खुलासे का एक आदर्श मॉडल बन चुका है।

मोबाइल फॉरेंसिक वैन (57 MFVs) एवं ई-साक्ष्य: नए आपराधिक कानूनों के तहत घटनास्थल पर वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन के लिए आधुनिक फॉरेंसिक वैनों को तैनात किया गया है।

5. फील्ड पुलिसिंग, विधि-व्यवस्था एवं सामुदायिक सहभागिता

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जमीनी स्तर पर विजिबल और प्रिवेंटिव पुलिसिंग पर जोर दिया जा रहा है:

माइक्रो बीट व्यवस्था: शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को बीट एवं माइक्रो बीट में विभाजित कर आरक्षक/प्रधान आरक्षक स्तर पर जनता से सीधा संवाद और लोकल इंटेलिजेंस संकलन सुनिश्चित किया गया है।

कॉम्बिंग गश्त (Combing Patrol):रात के समय पूरे जिले में एक साथ वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में सघन कॉम्बिंग गश्त कर स्थायी वारंटियों, फरार आरोपियों, असामाजिक तत्वों और निगरानी बदमाशों की चेकिंग की जाती है।

समय-समय पर बलवा ड्रिल (Riot Drill) का अभ्यास: किसी भी अप्रत्याशित भीड़ या उपद्रव की स्थिति से निपटने के लिए थानों व पुलिस लाइनों में आधुनिक दंगारोधी उपकरणों, आंसू गैस, वाटर कैनन और बलवा ड्रिल का नियमित मॉक अभ्यास कराया जाता है।

शांति समिति की बैठकें: संवेदनशील त्योहारों, जुलूसों व राष्ट्रीय पर्वों से पूर्व सभी समुदायों, धर्मगुरुओं, आयोजकों और गणमान्य नागरिकों के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण हेतु शांति समिति की बैठकों का अनिवार्य आयोजन।

ये भी पढ़ें :  सीएम और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष बताएंगे बजट की खास बातें, 5 लाख+ आबादी वाले शहरों को मिलेगा फंड

जनसंवाद एवं जनसुनवाई: प्रत्येक मंगलवार को जिला स्तर से लेकर थाना स्तर तक जनसुनवाई आयोजित कर पीड़ितों की समस्याओं का समयबद्ध व पारदर्शी निराकरण किया जाता है।

6. विशेष सामाजिक अभियान (Community Policing)

​ऑपरेशन मुस्कान (Operation Muskaan):गुमशुदा और अपहृत बालक-बालिकाओं को खोजकर उन्हें सुरक्षित परिजनों से मिलाने के लिए समय-समय पर विशेष अभियान चलाया जाता है।

​नशा मुक्ति एवं 'ड्रग-फ्री' अभियान: शिक्षण संस्थानों और युवाओं के बीच मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए नारकोटिक्स शाखा और स्थानीय पुलिस की संयुक्त सख्त कार्रवाई जारी है।

​साइबर जागरूकता (Cyber Awareness):डिजिटल अरेस्ट, पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड और यूपीआई घोटालों से जनता को सतर्क करने के लिए जन-जागरूकता सत्र संचालित किए जा रहे हैं।

7. जीवन रक्षा (CPR), दक्षता संवर्धन एवं नवीन भर्तियां

पुलिस बल को संवेदनशील बनाने के साथ-साथ संसाधनों और जनबल को भी सुदृढ़ किया जा रहा है:

सीपीआर (CPR) जीवन रक्षक प्रशिक्षण: आपातकालीन परिस्थितियों, सड़क दुर्घटनाओं या हृदय गति रुकने (Cardiac Arrest) के समय नागरिकों की जान बचाने के लिए पुलिसकर्मियों को प्राथमिक चिकित्सा एवं कार्डियोपल्मरी रिससिटेशन (CPR) का विधिवत प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मानसिक तनाव प्रबंधन: पुलिसकर्मियों के वेलफेयर के लिए 'हार्टफुलनेस' संस्था के साथ एमओयू कर तनाव प्रबंधन और ध्यान कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

नवीन पुलिस भर्तियां: पुलिस बल की कार्यक्षमता और ऊर्जा को बढ़ाने के लिए निरंतर नई भर्तियां की जा रही हैं।  वर्ष 2025 में लगभग 8,500 पदों पर भर्ती की अनुमति प्राप्त हुई, जिसमें लगभग 7,500 कांस्टेबल सहित सब-इंस्पेक्टर, सूबेदार, स्टेनो आदि पद शामिल हैं। कांस्टेबलों का प्रशिक्षण प्रारंभ हो चुका है तथा सब-इंस्पेक्टर एवं सूबेदार भर्ती प्रक्रिया भी पूर्ण हो चुकी है।

वर्ष 2026 में 9662 विभिन्न पदों पर भर्ती की अनुमति प्राप्त हुई है। इस प्रकार दो वर्षों में 18 हजार से अधिक नवीन पदों पर भर्ती का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

8. कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान — DGCR एवं के. एफ. रुस्तमजी अवॉर्ड

संवेदनशील कानून-व्यवस्था, असाधारण सूझबूझ और जनसेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा उन्हें निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

ग्राउंड पुलिसिंग में अद्वितीय योगदान, साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने, शांतिपूर्ण समाधान निकालने और जोखिम भरे अभियानों में साहसिक कर्तव्यनिष्ठा प्रदर्शित करने वाले चयनित पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को पुलिस महानिदेशक प्रशंसा डिस्क/रोल (DGCR – Director General's Commendation Roll) तथा मध्य प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिरीक्षक व पद्म विभूषण स्वर्गीय के. एफ. रुस्तमजी की स्मृति में स्थापित प्रतिष्ठित 'के. एफ. रुस्तमजी अवॉर्ड' से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान पुलिस बल में उत्कृष्ट कार्य, संवेदनशीलता और व्यावसायिक दक्षता को प्रोत्साहित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।

मध्यप्रदेश पुलिस का यह बहुआयामी दृष्टिकोण यह सिद्ध करता है कि संवाद, सतर्कता, तकनीकी नवाचार और कर्तव्यनिष्ठा के सम्मान के समन्वय से बड़ी से बड़ी चुनौती का शांतिपूर्ण समाधान संभव है। 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment