मुरैना में महापौर बीजेपी की, विधायक कांग्रेस के, फिर भी विकास की राह देख रहा शहर

मुरैना में महापौर बीजेपी की, विधायक कांग्रेस के, फिर भी विकास की राह देख रहा शहर

बारिश में तालाब बनीं सड़कें, गड्ढों में तब्दील रास्ते और सफाई व्यवस्था पर सवाल; राजनीतिक खींचतान के बीच जनता की समस्याएं बरकरार

मुरैना
 शहरवासियों ने नगर निगम चुनाव में महापौर और सभापति दोनों पदों पर कांग्रेस को चुनकर शहर की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई थी। लोगों को लगा था कि सड़कों की हालत सुधरेगी, नाले-नालियों की नियमित सफाई होगी और घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचेगा। इसके बाद विधानसभा चुनाव में भी मुरैना की जनता ने कांग्रेस के दिनेश गुर्जर को विधायक चुना। लेकिन समय के साथ राजनीतिक समीकरण बदल गए, महापौर शारदा सोलंकी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गईं और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद शहर की बुनियादी समस्याओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालात यह हैं कि बारिश के दौरान कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई, जबकि शहर की अनेक सड़कों की बदहाली लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।

महापौर-विधायक अलग-अलग दलों में, जवाबदेही पर सवाल

मुरैना में वर्तमान राजनीतिक समीकरण के तहत महापौर शारदा सोलंकी भाजपा में हैं, जबकि विधायक दिनेश गुर्जर कांग्रेस से हैं। ऐसे में शहर के विकास को लेकर दोनों जनप्रतिनिधियों की भूमिका और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। विपक्ष में बैठी कांग्रेस शहर की समस्याओं को लेकर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करती रही है, लेकिन राजनीतिक विरोध का केंद्र महापौर के बजाय नगर निगम आयुक्त रहने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं हैं कि क्या शहर के विकास से जुड़े मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों का रुख पर्याप्त रूप से स्पष्ट है? हालांकि, इस संबंध में संबंधित नेताओं का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

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बारिश में तालाब बने कई इलाके

बारिश के मौसम में बस स्टैंड से लेकर न्यू हाउसिंग बोर्ड, केशव कॉलोनी, सदर बाजार और विक्रम नगर सहित कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई। बारिश के पानी की निकासी को लेकर नाले-नालियों की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। जलभराव से आम लोगों, दुकानदारों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शहरवासियों की अपेक्षा है कि नगर निगम जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए स्थायी कार्ययोजना बनाए, ताकि हर बारिश में उन्हें इसी समस्या से न जूझना पड़े।

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गणेशपुरा से सदर बाजार तक सड़कों की हालत खराब

शहर की सड़कों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। गणेशपुरा, सदर बाजार, गोपीनाथ की पुलिया और केशव कॉलोनी सहित विभिन्न इलाकों में सड़कों पर गड्ढे होने और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ सड़कों के गारंटी अवधि के दौरान ही खराब होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। यदि इन शिकायतों की पुष्टि होती है, तो संबंधित निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कर ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

सड़क निर्माण और मरम्मत पर सरकारी राशि खर्च होने के बाद भी यदि लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा नहीं मिलती, तो यह नगर निगम की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ठेकेदारों की भूमिका और निर्माण कार्यों की जांच की मांग

शहर में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और ठेकेदारों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव रखने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है। नगर निगम को चाहिए कि सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान, निर्धारित समयसीमा और गारंटी अवधि की समीक्षा कर स्थिति सार्वजनिक करे।

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जनता को चाहिए समाधान, आरोप-प्रत्यारोप नहीं

मुरैना की जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि महापौर और विधायक के अलग-अलग राजनीतिक दलों में होने के बावजूद शहर की बुनियादी समस्याओं का समाधान कब होगा? शहरवासियों को राजनीतिक बयानबाजी से अधिक साफ-सफाई, बेहतर जल निकासी, स्वच्छ पेयजल और गड्ढामुक्त सड़कों की जरूरत है।

अब नगर निगम प्रशासन, महापौर और क्षेत्रीय विधायक की जिम्मेदारी है कि वे आपसी राजनीतिक समीकरणों से ऊपर उठकर शहर की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाएं। जनता ने जनप्रतिनिधियों को शहर के विकास की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में उनके कामकाज का आकलन राजनीतिक दलों के आधार पर नहीं, बल्कि शहर में हुए विकास और लोगों को मिली सुविधाओं के आधार पर होना चाहिए।

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