योगी सरकार का जोर, आत्मनिर्भर बनेंगे शहर

छठे राज्य वित्त आयोग के सम्मेलन में 17 नगर निगमों के महापौरों ने बताईं प्राथमिकताएं

लखनऊ के विस्तारित क्षेत्रों के विकास के लिए 7,603 करोड़ रुपये की वित्तीय जरूरत, महापौर सुषमा खर्कवाल ने रखीं मांगें

नगर निकायों की वित्तीय आत्मनिर्भरता आधुनिक शहरों के विकास का आधार- सुरेश खन्ना, वित्त मंत्री

लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शहरी विकास को गति देने और नगर निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में वित्तीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में नगर निकायों की आय बढ़ाने, नागरिक सुविधाओं का विस्तार करने और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की गई। प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि नगर निकायों की वित्तीय आत्मनिर्भरता ही सशक्त और आधुनिक शहरों के विकास का आधार है। बढ़ते शहरीकरण के बीच नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निकायों को अपनी आय बढ़ाने, वित्तीय प्रबंधन सुदृढ़ करने और संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना होगा।

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वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को गोमती नगर स्थित होटल ताज महल में छठे राज्य वित्त आयोग, यूनिसेफ और डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'शहरों की बात सुनना, शहरी चुनौतियों का समाधान' विषयक सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। सम्मेलन में प्रदेश के 17 नगर निगमों के महापौरों ने शहरी विकास की चुनौतियों और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया।

नगर निकायों की आय बढ़ाने और वित्तीय प्रबंधन पर जोर
वित्त मंत्री ने स्वच्छता, सीवरेज व्यवस्था, सेप्टेज प्रबंधन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को शहरी विकास की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया। सम्मेलन में संपत्ति कर का दायरा बढ़ाने, कर संग्रह में सुधार, उपयोगकर्ता शुल्क और नगर निकायों की परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग से आय बढ़ाने के उपायों पर मंथन हुआ। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए म्युनिसिपल बॉण्ड जैसे वित्तीय विकल्पों की उपयोगिता पर भी चर्चा की गई।

धार्मिक एवं पर्यटन नगरों में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के कारण नागरिक सुविधाओं पर बढ़ने वाले दबाव को देखते हुए कानूनी प्रावधानों के तहत पर्यटन शुल्क अथवा नगर पर्यटन कर की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। महापौरों ने पेयजल, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, नगर नियोजन और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए। बच्चों, महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा सुरक्षित, स्वच्छ और समावेशी शहर विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।

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लखनऊ के विस्तारित क्षेत्रों के विकास के लिए 7,603 करोड़ रुपये की जरूरत
सम्मेलन में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने गोमती नदी से सटे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान और आधारभूत संरचनाओं को पहुंची क्षति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में पुनर्निर्माण, जल निकासी और नागरिक सुविधाओं की बहाली के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। नगर निगम में शामिल विस्तारित क्षेत्रों के विकास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तुत प्रतिवेदन में लगभग 7,603 करोड़ रुपये की वित्तीय जरूरत का आकलन किया गया है।

लखनऊ महापौर ने आयोग के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें
लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने छठे राज्य वित्त आयोग से नगर निगम का निर्धारित वित्तीय अंश दोगुना करने का आग्रह किया। उन्होंने विस्तारित क्षेत्रों में विकास, मार्ग प्रकाश और प्रशासनिक व्यय के लिए 2,184 करोड़ रुपये तथा पेयजल और सीवर व्यवस्था के लिए 5,825.85 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की मांग रखी। इसके अलावा स्टाम्प ड्यूटी की निर्धारित दो प्रतिशत धनराशि नगर निगम को देने का अनुरोध किया। महापौर ने यूपीसीडा की संपत्तियों और कुछ श्रेणियों को कर छूट से होने वाली राजस्व हानि की भरपाई की मांग भी उठाई।

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पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने पर भी मंथन
सम्मेलन में 16वें वित्त आयोग और छठे राज्य वित्त आयोग की संवैधानिक भूमिकाओं के संदर्भ में नगर निकायों की वित्तीय स्थिति, संस्थागत क्षमता, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने पर चर्चा हुई। छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं अपर मुख्य सचिव, वित्त दीपक कुमार ने उद्घाटन संबोधन किया। आयोग के सचिव सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया। नील रतन, आलोक दीक्षित तथा यूनिसेफ के डॉ. सौमेन बागची और पियूष एंटनी सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

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