E100 और E85 फ्यूल से चलेंगी कारें, केंद्र सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को दी मंजूरी

नई दिल्ली
 केंद्र सरकार ने सोमवार को केंद्रीय मोटर व्हीकल नियमों में किए गए बदलाव की अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार ने नियमों में संशोधन को मंजूरी देते हुए 100 प्रतिशत इथेनॉल (E100) और E85 ईंधन से चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को आधिकारिक रूप से अनुमति दे दी है।

अब ऐसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अनुमति मिल गई है, जो 100 प्रतिशत तक एथनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चल सकते हैं। यह बदलाव ऐसे समय में आया है, जब कुछ कार निर्माता कंपनियां जल्द ही अपने E100 मॉडल्स मार्केट में लॉन्च करने की तैयारी में हैं।

ये भी पढ़ें :  छत्तीसगढ़-बलरामपुर रामानुजगंज में बच्चों की आंख से बह रहा खून, मोबाइल की लत से बचाने स्कूल का अनोखा तरीका

उत्सर्जन से जुड़े नियम किए गए अपडेट
एक अधिकारी ने बताया कि इन संशोधनों के जरिए उत्सर्जन से जुड़े नियमों को अपडेट किया गया है, जिसमें E85 के साथ-साथ E100 को भी शामिल किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, E85 और E100 का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकता है, जिन्हें विशेष रूप से इनके उपयोग के लिए डिजाइन और प्रमाणित किया गया है। हालांकि, अन्य वाहनों पर ये नियम लागू नहीं होंगे।

जो वाहन E20 या सामान्य ईंधन का उपयोग करते हैं, वे E85 या E100 ईंधन का इस्तेमाल नहीं कर सकते। इस अधिसूचना के तहत, मौजूदा वाहनों के मालिकों को न तो E85 ईंधन पर स्विच करने की जरूरत है और न ही उन्हें अभी या भविष्य में अपने वाहनों में कोई बदलाव करने की आवश्यकता है।

ये भी पढ़ें :  पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में अगले सात दिन भारी बारिश की चेतावनी, अगस्त-सितंबर में और तेज़ी

वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही तकनीक
ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। इन विशेष वाहनों को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे एक ही फ्यूल टैंक में पेट्रोल और एथनॉल के विभिन्न अनुपातों पर आसानी से चल सकें। वाहन के सर्टिफिकेशन के आधार पर यह मिश्रण E85 या 100 प्रतिशत एथनॉल (E100) तक हो सकता है।

ये भी पढ़ें :  कोमा में मोजतबा खामेनेई: न युद्ध की खबर, न सीजफायर का होश, लोकेशन का पता चलने पर चौकाने वाली स्थिति

अधिकारियों ने कहा कि सामान्य पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल का फॉसिल कार्बन फुटप्रिंट कम होता है। एथनॉल के अधिक मिश्रण का उपयोग करने से वाहनों से निकलने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और कुछ हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, एथनॉल का अधिक उपयोग कच्चे तेल के आयात पर हमारी निर्भरता को भी कम करेगा।

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment