इजरायल में सियासी संकट गहराया, अब सीधे चुनाव से चुना जा सकता है प्रधानमंत्री

 नई दिल्ली
 इजरायल में चुनाव में किसी गठबंधन को बहुमत न मिलने से नई सरकार के गठन की तस्वीर साफ नहीं हुई है। वैसे गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले मध्यमार्गी गठबंधन की अरब पार्टियों के गठबंधन से समझौते के लिए वार्ता चल रही है। लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खास लिकुड पार्टी के नेता आमिर ओहाना को संसद नीसेट के स्पीकर पद से हटाने पर विपक्षी खेमे में सहमति बन गई है।

इस बीच देश में पिछले 10 वर्षों में हुए चुनावों में बहुमत न मिल पाने से पैदा हुई समस्या से निपटने के लिए सीधे प्रधानमंत्री चुने जाने के प्रस्ताव पर चर्चा तेज हो गई है। वैसे इस तरह का प्रस्ताव 2021 में किसी दल या गठबंधन को बहुमत न मिलने पर बेंजामिन नेतन्याहू ने किया था।

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एएनआइ के अनुसार इस बार प्रधानमंत्री पद के लिए सीधे चुनाव पर चर्चा मौजूदा विपक्षी खेमे में शुरू हुई है। सरकार गठन की तस्वीर न बनने पर शुक्रवार को गठित होने वाली संसद के पहले ही सत्र में इस बाबत प्रस्ताव लाया जा सकता है।

इस प्रस्ताव को वर्तमान सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों का ही समर्थन मिल सकता है। इस प्रस्ताव को लेकर अरब पार्टियां असमंजस में हैं, उन्हें भी तैयार करने की कोशिश हो रही है।

इससे 120 सदस्यीय नीसेट में बहुमत के लिए बार-बार संकट खड़े होने की समस्या से निजात पाई जा सकेगी। सीधे चुने गए प्रधानमंत्री अपनी पसंद की मंत्री परिषद गठित कर सरकार चला सकेंगे।

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इसके लिए प्रधानमंत्री पद पर चुने व्यक्ति को नीसेट में बहुमत की जरूरत नहीं होगी। यह चुनाव और उसके बाद की प्रशासनिक व्यवस्था कुछ वैसी ही होगी जैसी कि अमेरिका में है। अमेरिका में राष्ट्रपति को मतदाता सीधे वोट देकर चुनते हैं।

टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार शनिवार देर शाम इजरायली शहरों में उमड़े नेतन्याहू सरकार विरोधी लोगों ने मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों से साथ आकर सरकार बनाने की मांग की।

इन लोगों का कहना था कि बहुमत (मेजोरिटी) मतदान नेतन्याहू सरकार के विरोध में हुआ है, इसलिए विरोधी दलों को एकजुट होकर नई सरकार बनानी चाहिए। इस मांग को लेकर तेल अवीव, बीरशेबा, हाइफा और तईबा में प्रदर्शन हुए हैं।

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विदित हो कि नेतन्याहू विरोधी मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के पास 67 सांसद हैं जबकि सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास 53 सांसद हैं। सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यों वाली नीसेट में 61 सांसदों का समर्थन चाहिए।

इस बीच नेतन्याहू विरोधी दोनों गठबंधनों में शुक्रवार को नई नीसेट के गठन के साथ ही नेतन्याहू के विश्वस्त आमिर ओहाना को स्पीकर पद से हटाने पर सहमति बन गई है। इसके जरिये बहुमत के आधार पर नेतन्याहू को झटका देने की तैयारी है। विपक्षी खेमे का मानना है कि नेतन्याहू को सत्ता से दूर करने के लिए ओहाना को स्पीकर पद से हटाना जरूरी है।

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