नक्सल मुक्त केसकोड़ी में वीबी-जीरामजी योजना से बना पहला बालिका शौचालय ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के तहत बेटियों को मिली स्वच्छता और सम्मान की सुविधा रायपुर कांकेर जिले के जनपद पंचायत कोयलीबेड़ा के नक्सल मुक्त ग्राम पंचायत केसकोड़ी में अब विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। कभी नक्सल समस्या से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में अब शिक्षा, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) योजना के अंतर्गत ग्राम…
Read MoreTag: naxal
कोरर नक्सली हमले में 9 साल बाद बड़ा फैसला, 25 लाख के इनामी प्रभाकर और पत्नी को 7-7 साल की सजा
कांकेर छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले अंतर्गत आने वाले कोरर थाना क्षेत्र में साल 2015 में सुरक्षाबलों की संयुक्त पुलिस पार्टी पर घात लगाकर किए गए जानलेवा नक्सली हमले के मामले में 9 साल के लंबे इंतजार के बाद अदालत का फैसला आ गया है. एनआईए एक्ट एवं अनुसूचित अपराध की विशेष न्यायाधीश विभा पाण्डेय की अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और केस डायरी के आधार पर प्रतिबंधित नक्सली संगठन के शीर्ष कैडर SZDCM प्रभाकर राव और उसकी पत्नी DVCM राजे कांगे सहित कुल 5 आरोपियों को दोषी पाया…
Read Moreरायपुर में नक्सल पीड़ित 5 परिवारों को मिली शासकीय सेवा, कलेक्टर ने सौंपे नियुक्ति पत्र
रायपुर : नक्सल पीड़ित 5 परिवारों के सदस्यों को मिली शासकीय सेवा नक्सल पुनर्वास नीति से जीवन में आई स्थिरता, कलेक्टर श्रीमती तनुजा सलाम ने सौंपे नियुक्ति पत्र आर्थिक संबल के साथ आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की राह हुई प्रशस्त रायपुर, नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित नक्सल पुनर्वास नीति के तहत मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी…
Read Moreनक्सल प्रभावित इलाके में बदलाव की मिसाल, डॉक्टर रामटेके की 23 साल की मेहनत से बना मॉडल अस्पताल
कांकेर एक समय छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता था. घने जंगलों से घिरा यह इलाका नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता था. सड़कें कम थीं, संचार के साधन सीमित थे और स्वास्थ्य सुविधाएं लगभग न के बराबर. किसी को गंभीर बीमारी हो जाए तो इलाज से ज्यादा चिंता अस्पताल तक पहुंचने की होती थी. मलेरिया यहां की सबसे बड़ी समस्या थी और हर साल सैकड़ों परिवार इसके कारण तबाह हो जाते थे। लेकिन आज उसी अंतागढ़ का एक…
Read Moreसंघर्ष से समृद्धि- नक्सल मुक्त क्षेत्रों में आधुनिक खेती से कृषक गोपाल एर्रागोला ने रची सफलता की नई इबारत
संघर्ष से समृद्धि- नक्सल मुक्त क्षेत्रों में आधुनिक खेती से कृषक गोपाल एर्रागोला ने रची सफलता की नई इबारत रायपुर नक्सल मुक्त क्षेत्रों (जैसे छत्तीसगढ़ के बस्तर, सुकमा, नारायणपुर) में अब पारंपरिक खेती की जगह आधुनिक और लाभकारी खेती (केला, सुगंधित पौधे) ले रही है, जिससे किसानों की आय दोगुनी हो रही है। कृषि विज्ञान केंद्रों की मदद से वैज्ञानिक तकनीक, ड्रिप सिंचाई और उन्नत बीजों का उपयोग कर किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं और कृषि अब एक सुरक्षित आजीविका बन रही है बीजापुर…
Read Moreजनजातीय उत्थान पर बड़ा फोकस: नक्सल मुक्त क्षेत्रों में तेज़ होगा विकास, ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ जल्द
जनजातीय उत्थान पर बड़ा फोकस: नक्सल मुक्त क्षेत्रों में तेज़ होगा विकास, ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ जल्द मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक सम्पन्न रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास को लेकर व्यापक चर्चा की गई और अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर, जो भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा क्षेत्र है, दशकों तक विकास से वंचित रहा,…
Read Moreबीजापुर में विकास की नई दस्तक: नियद नेल्लानार, मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास से बदल रही 224 गांवों की तस्वीर
बीजापुर में विकास की नई दस्तक: नियद नेल्लानार, मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास से बदल रही 224 गांवों की तस्वीर दशकों से विकास से कटे इलाकों में पहुंचा रोजगार, राशन, शिक्षा और सुरक्षित आवास; 5 लाख मानव दिवस सृजित वापस लौटे गांव, बदली जिंदगी: नक्सल इलाके में विकास की सशक्त कहानी रायपुर लंबे समय तक नक्सल प्रभाव के कारण विकास से अछूते रहे बीजापुर जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में अब बदलाव की बयार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के संयुक्त प्रयासों से उन गांवों…
Read Moreजहॉ बन्दूकें थीं, अब बहता है पानी- हेटारकसा की बदली तस्वीर
जहॉ बन्दूकें थीं, अब बहता है पानी- हेटारकसा की बदली तस्वीर रायपुर कभी नक्सल गतिविधियों के कारण विकास से अछूता रहा कोयलीबेड़ा विकासखंड के ग्राम हेटारकसा आज बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जहां पहले सड़क, संचार और मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच मुश्किल थी, वहीं अब शासन के नक्सल उन्मूलन अभियान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से गांव में विकास दिखने लगा है। नक्सल प्रभाव के कारण वर्षों तक इस क्षेत्र में योजनाओं का क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण रहा। दुर्गम भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा कारणों से पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा भी…
Read Moreनक्सल क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण, पक्का घर बना सम्मानजनक जीवन का आधार
नक्सल क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण, पक्का घर बना सम्मानजनक जीवन का आधार रायपुर बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत धर्मावरम ग्राम से एक सकारात्मक बदलाव की कहानी सामने आई है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास की नई तस्वीर बयान करती है। कभी नक्सल प्रभावित यह इलाका अब शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से विकास की मुख्यधारा से जुड़ता दिखाई दे रहा है। इसी परिवर्तन की मिसाल हैं 60 वर्षीय श्रीमती गुण्डी बुचम्मा, जिन्होंने वर्षों तक कच्चे एवं खपरैल वाले मकान में…
Read Moreउत्तर बस्तर कांकेर : विशेष लेख : कभी बंदूक थामकर हिंसा करने वाले माओवादी अब सीख रहे हुनर
उत्तर बस्तर कांकेर : विशेष लेख : कभी बंदूक थामकर हिंसा करने वाले माओवादी अब सीख रहे हुनर नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों के शिक्षा पर भी विशेष ध्यान उत्तर बस्तर कांकेर जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा की मार्ग अपनाया था, अब वहीं हाथ अपने हुनर का कमाल दिखा रहे हैं। भानुप्रतापपुर के पास ग्राम चौगेल के पुनर्वास केन्द्र में प्रशिक्षण प्राप्त आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा हुनर दिखाते हुए काष्ठ कला से नेम प्लेट, छत्तीसगढ़…
Read Moreसंघर्ष और भटकाव के बाद मनकू कड़ती की नई शुरुआत
संघर्ष और भटकाव के बाद मनकू कड़ती की नई शुरुआत रायपुर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अंचल में बदलाव की कई कहानियां उभर रही हैं। इन्हीं में से एक कहानी है बीजापुर जिले के छोटे से गांव चेरली के युवक मनकू कड़ती की, जिनका जीवन संघर्ष, भटकाव और फिर सकारात्मक परिवर्तन का उदाहरण बनकर सामने आया है। बीजापुर जिले के चेरली गांव में जन्मे मनकू कड़ती का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। गरीबी, असुरक्षा और सीमित संसाधनों के बीच उनका परिवार लगातार चुनौतियों से जूझता रहा। पारिवारिक स्थिति उस समय…
Read Moreनक्सलवाद का अंधेरा छोड़ शर्मिला ने थामी स्वावलंबन की सुई
नक्सलवाद का अंधेरा छोड़ शर्मिला ने थामी स्वावलंबन की सुई दंतेवाड़ा में लिख रही हैं बदलाव की इबारत रायपुर बस्तर संभाग के नक्सल मुक्त घोषित होने के बाद अब हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगा है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल बीजापुर की शर्मिला पोयामी बनकर उभरी हैं, जिन्होंने कभी हाथों में बंदूक थामी थी, लेकिन आज वे लाइवलीहुड कॉलेज में सुई-धागे से अपने और अपने परिवार के भविष्य के सपने बुन रही हैं। हिंसा के रास्ते से मुख्यधारा का सफर…
Read Moreछत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त होने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर श्रद्धांजलि एवं दीपदान कार्यक्रम आयोजित
बिलासपुर छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त होने की ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में भारतीय जनता युवा मोर्चा, जिला बिलासपुर द्वारा सत्यम चौक स्थित शहीद विनोद चौबे जी की स्मृति में श्रद्धांजलि एवं दीपदान कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए दीप प्रज्वलित कर उनके बलिदान को नमन किया। कार्यक्रम में बिलासपुर विधायक माननीय अमर अग्रवाल जी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। साथ ही भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक सिंह जी, भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष वैभव गुप्ता जी…
Read Moreनक्सल पीड़ितों को नया जीवन: कलेक्टर ने सौंपे नियुक्ति पत्र, कांकेर बना पहला प्रशिक्षण और रोजगार प्रदान करने वाला जिला
हिंसा छोड़कर नई दिशा, नई राह की ओर बढ़ रहे कदम आत्मसमर्पित व नक्सल पीड़ितों को कलेक्टर ने सौंपा नियुक्ति पत्र प्रशिक्षण उपरांत रोजगार देने वाला पहला जिला बना कांकेर रायपुर मानव समाज का सबसे उत्कृष्ट पहलू सकारात्मक परिवर्तन है, जिससे जीवन में नवाचार और नए विचार जन्म लेते हैं। ऐसा ही बदलाव आत्मसमर्पित माओवादियों के जीवन में दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर उन्हें पहले प्रशिक्षित किया गया और अब कुशल होने के बाद रोजगार भी मुहैया हो रहा है। आत्मसमर्पित माओवादियों को भानुप्रतापपुर के ग्राम…
Read Moreआत्मसमर्पित नक्सली डेढ़ महीने से सीख रहे सिलाई और ड्राइविंग, बालाघाट पुलिस की पहल से 14 परिवारों को मिली सरकारी नौकरी
बालाघाट बालाघाट पुलिस ने नक्सलियों को समाज की मुख्य धारा में वापस लाने और नक्सली हिंसा के पीड़ितों की मदद के लिए एक खास मुहिम शुरू की है। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सली अब हथियार छोड़कर सिलाई और ड्राइविंग जैसे काम सीख रहे हैं. पुलिस लाइन में फिलहाल 10 आत्मसमर्पित नक्सली (5 पुरुष और 5 महिला) सिलाई और ड्राइविंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं। पिछले डेढ़ महीने से चल रही इस ट्रेनिंग में ये लोग शर्ट-पेंट सिलना और जेसीबी चलाना सीख रहे हैं ताकि वे खुद का रोजगार…
Read More
