16 साल बाद कांग्रेस ने 700 जिला अध्यक्षों को बुलाया दिल्ली

नई दिल्ली

एक के बाद एक कई चुनावों में हार झेलने वाली कांग्रेस पार्टी अब अपने संगठन को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने अपनी जिला कांग्रेस कमेटियों (DCC) को संगठन का "केंद्र बिंदु" बनाने की दिशा में कदम उठाया है। इसके तहत AICC देश भर के लगभग 700 जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों की एक तीन दिवसीय बैठक का आयोजन कर रही है। यह बैठक 27-28 मार्च और 3 अप्रैल को नई दिल्ली में तीन बैचों में होगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य एक नई संगठनात्मक रूपरेखा को लागू करना है, जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी की मशीनरी को मजबूत किया जा सके।

पायलट प्रोजेक्ट गुजरात में लागू किया जाएगा

यह बैठक 16 साल बाद होने जा रही है, जो कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस पहल का पायलट प्रोजेक्ट गुजरात में लागू किया जाएगा, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बैठक में DCC अध्यक्षों को उम्मीदवारों के चयन में अहम भूमिका देने और संगठन को सशक्त बनाने पर जोर दिया जाएगा।

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AICC के महासचिवों और प्रभारियों की एक बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल थे। इस बैठक में प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कुछ नेताओं के एक अनौपचारिक समूह द्वारा तैयार की गई संगठनात्मक मजबूती की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा, "यह बैठक हमारी जिला इकाइयों को सशक्त बनाने और संगठन को नई दिशा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। हमारा लक्ष्य जमीनी स्तर पर पार्टी की ताकत को बढ़ाना है।"

अन्य राज्यों में भी लागू करने की योजना
पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बैठक के जरिए कांग्रेस अपनी रणनीति को और प्रभावी बनाना चाहती है, खासकर उन राज्यों में जहां जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं। गुजरात में इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के आधार पर इसे अन्य राज्यों में भी लागू करने की योजना है। यह कदम कांग्रेस के लिए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच नई ऊर्जा भरने का प्रयास माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस बैठक के नतीजे पार्टी की भविष्य की रणनीति पर गहरा असर डाल सकते हैं।

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गुजरात पर ही कांग्रेस का फोकस क्यों है?
गुजरात पिछले तीन दशकों से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मजबूत गढ़ रहा है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य भी है। अगर कांग्रेस गुजरात में सफलता हासिल कर लेती है, तो यह बीजेपी की अजेय छवि को चुनौती दे सकता है और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की स्थिति को मजबूत कर सकता है।

इसके अलावा, गुजरात महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की जन्मभूमि है। इन नेताओं ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई और कांग्रेस की नींव को मजबूत किया। गुजरात में वापसी करना पार्टी के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने और ऐतिहासिक गौरव को पुनर्जनन का प्रतीक है।

गुजरात में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक, खासकर ग्रामीण इलाकों, आदिवासी क्षेत्रों और कुछ शहरी मतदाताओं के बीच, अभी भी मौजूद है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 77 सीटें जीती थीं, जो बीजेपी के लिए कड़ी टक्कर थी। हालांकि 2022 के चुनाव में पार्टी महज 17 सीटें ही जात पाई। पार्टी मानती है कि अगर वह अपने वोट प्रतिशत को 5-10% और बढ़ा सके, तो सत्ता में आना संभव है।

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गुजरात में कांग्रेस लंबे समय से संगठनात्मक रूप से कमजोर रही है, जिसके कारण नेताओं का पलायन और आंतरिक कलह बढ़ा है। अब पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी मशीनरी को मजबूत करने के लिए गुजरात को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती है, जैसा कि हाल की AICC की बैठक और राहुल गांधी के दौरे से संकेत मिलता है।

2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव और उससे पहले स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए कांग्रेस अभी से तैयारी करना चाहती है। हाल के लोकसभा चुनाव (2024) में बनासकांठा सीट जीतने के बाद पार्टी को उम्मीद है कि वह इस सफलता को आगे बढ़ा सकती है।

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