पहलगाम आतंकी हमले के बाद देशभर में सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता, दिल्ली में हाईलेवल बैठक

नई दिल्ली

पहलगाम आतंकी हमले के बाद देशभर में आक्रोश का महौल है। साथ ही सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी सिलसिले में मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने की। इसमें बीएसएफ, एनएसजी और असम राइफल्स के प्रमुखों के साथ-साथ एसएसबी और सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी।

बैठक में शामिल हुए ये अधिकारी
बैठक में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के प्रमुख ब्रिघु श्रीनिवासन, असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा और एसएसबी की अतिरिक्त महानिदेशक अनुपमा नीलेकर चंद्रा मौजूद थीं।

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जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों का एक्शन
वहीं सोमवार को जम्मू और कश्मीर पुलिस ने डोडा जिले में 13 स्थानों पर छापे मारे, ताकि आतंकवादी ठिकानों का पर्दाफाश किया जा सके और आतंक गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही, श्रीनगर पुलिस ने शहर के कई स्थानों पर ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के सहयोगियों के घरों पर व्यापक छापेमारी की। मामले में जारी पुलिस विज्ञप्ति के अनुसार श्रीनगर पुलिस ने 63 व्यक्तियों के घरों की तलाशी ली।

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इन कारणों से की जा रही छापेमारी
मीडिया रिपोर्ट की माने तो यह छापेमारी कानूनी प्रक्रिया के तहत और जम्मू और कश्मीर पुलिस के अधिकारियों की निगरानी में की गई, ताकि हथियार, दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण आदि जमा किए जा सकें और किसी भी संभावित आतंकवादी गतिविधि को रोकने के लिए सबूत जुटाए जा सकें।

पहलगाम आतंकी हमला, एज नजर
पहलगाम में मंगलवार 22 अप्रैल को आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी। सेना की वर्दी में आए दहशतगर्दों ने पहलगाम की बायसरन घाटी में पर्यटकों से पहले उनका धर्म पूछा, परिचय पत्र देखे और फिर हिंदू हो कहकर गोली मार दी। 26 मृतकों में ज्यादातर पर्यटक हैं, जबकि दो विदेशी और दो स्थानीय नागरिक शामिल हैं।

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टीआरएफ ने ली हमले की जिम्मेदारी
तीन जुलाई से शुरू होने जा रही श्रीअमरनाथ यात्रा से पहले इस कायराना हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े गुट द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। फरवरी, 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद से जम्मू-कश्मीर में यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है। उस हमले में सीआरपीएफ के 47 जवान मारे गए थे। 

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