ASI की बेटी बनी डिप्टी कलेक्टर, शादी के अल्टीमेटम के बीच बिना कोचिंग सेल्फ स्टडी से रची सफलता की मिसाल

हरदा 

जब सपने बड़े हों और इरादे फौलादी, तो ना गांव की तंग गलियां रास्ता रोक पाती हैं और ना ही समाज का दबाव…कुछ ऐसी ही कहानी है मध्य प्रदेश के हरदा जिले के एक छोटे से गांव सिराली की रहने वाली शिवानी उइके की. शिवानी उइके आगामी 27 जुलाई को बुरहानपुर जिले में डिप्टी कलेक्टर के तौर पर पदभार ग्रहण करने जा रही हैं. लेकिन सफलता का ये मुकाम हासिल करना उनके लिए आसान नहीं रहा…घर वालों से मिले शादी के अल्टीमेटम, आर्थिक तंगी के बीच बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने की मजबूरी और परीक्षा के दिन 102 डिग्री तेज बुखार..जैसी चुनौतियां को सामना करते हुए शिवानी ने  मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) में सफलता का झंडा गाड़ा है. जानिए एक ASI की बेटी शिवानी की इस प्रेरणादायक सफलता की पूरी कहानी। 

गांव के सरकारी स्कूल से सफर की शुरुआत
शिवानी के पिता देवकरण उइके हरदा जिले के हंडिया थाने में एएसआई (ASI) के पद पर कार्यरत हैं. पिता खाकी वर्दी में देश की सेवा कर रहे थे, तो बेटी की आंखों में भी अफसर बनकर समाज बदलने का सपना तैर रहा था. लेकिन उनका बचपन बेहद साधारण हालात में बीता है. सिराली गांव में ही रहकर उन्होंने वहीं के सरकारी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए भोपाल के सरोजिनी नायडू कॉलेज पहुंचीं और बीएससी (B.Sc.) की डिग्री हासिल की। 

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'या तो अफसर बनो या शादी करो'… परिवार का अल्टीमेटम

पर शिवानी की सफलता का सफर इतना आसान नहीं था. कोविड-19 महामारी के दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई. समाज का दबाव बढ़ने लगा और घर में शिवानी की शादी की बातें शुरू हो गईं. एक वक्त ऐसा आया जब परिवार ने साफ अल्टीमेटम दे दिया— 'या तो घर रहकर परीक्षा पास करके दिखाओ, या फिर शादी के लिए तैयार हो जाओ.' यह शिवानी के जीवन का सबसे मुश्किल मोड़ था. तब शिवानी ने ठान लिया कि शादी वैगरह बाद में पहले करियर बनाना है. लिहाजा उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना। 

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दिन में ट्यूशन, रात भर पढ़ाई और केवल 'सेल्फ स्टडी'

खुद का खर्च निकालने और पढ़ाई जारी रखने के लिए शिवानी ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया. दिन भर बच्चों को पढ़ाना और रात-रात भर किताबों में डूबे रहना ही उनका नियम बन गया. शुरुआती नाकामियों से टूटने के बजाय उन्होंने खुद को और मजबूत किया. बिना किसी महंगी कोचिंग के, सिर्फ अपनी 'सेल्फ-स्टडी' के दम पर शिवानी ने इंदौर में रहकर MPPSC की तैयारी की और साल 2022 की परीक्षा में सफलता का परचम लहरा दिया. शिवानी के समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्य परीक्षा के बेहद महत्वपूर्ण दिनों में उन्हें तेज बुखार आ गया था. शरीर टूट रहा था, लेकिन हौसला नहीं. वे उसी हालत में परीक्षा केंद्र गईं और पूरा पेपर दिया. अहम ये भी है कि अपनी तैयारी के दौरान शिवानी ने सोशल मीडिया और मनोरंजन से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। 

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'डायरेक्टर जनरल ट्रॉफी' से सम्मानित
चयन के बाद भोपाल स्थित प्रशिक्षण अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान उनके शानदार प्रदर्शन और अनुशासन को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित "डायरेक्टर जनरल ट्रॉफी" से नवाजा गया. एक तरफ पिता थाने में एएसआई के पद पर कानून-व्यवस्था संभाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बेटी अब 27 जुलाई से बुरहानपुर में डिप्टी कलेक्टर के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी शुरू करने जा रही हैं. एक ही परिवार में पिता और बेटी का यह प्रशासनिक सफर पूरे हरदा जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है. शिवानी की यह कामयाबी आज देश की हर उस बेटी को यह संदेश देती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी रुकावट आपको आपकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। 

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