महाराष्ट्र में मराठी को लेकर बड़ा फैसला? ड्राइविंग लाइसेंस नियम से उत्तर भारतीयों की बढ़ी चिंता

मुंबई

महाराष्ट्र सरकार ने यात्रियों के साथ बेहतर संवाद और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाने के उद्देश्य से राज्य भर में सभी व्यावसायिक वाहन चालकों को मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया है। राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने कमर्शियल पैसेंजर गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की जो शर्त रखी है, वह ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों पर भी लागू होगी। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार (12 अगस्त) को यह साफ किया कि ओला, उबर और रैपिडो जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों के ज़रिए गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों को राज्य के भाषा नियमों से कोई छूट नहीं मिलेगी।

मराठी नहीं जानने वाले ऑटो, कैब ड्राइवर्स के लाइसेंस 18 अगस्त से 3 महीने तक के लिए सस्पेंड हो जाएंगे। वहीं, अगर ऐसा बार-बार होता है तो उनके लाइसेंस कैंसिल हो सकते हैं।

यानी 'महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2026' के तहत ऑटो-रिक्शा, पारंपरिक टैक्सी और ओला-उबर जैसे ऐप-आधारित एग्रीगेटर ड्राइवरों को अब स्थानीय भाषा (मराठी) में व्यावहारिक बातचीत की क्षमता साबित करनी होगी। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने घोषणा की है कि 1989 के नियमों में किए गए इस संशोधन का पालन न करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। राज्य सरकार के इस फैसले से वैसे उत्तर भारतीयों के रोजी-रोटी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, जो लंबे समय से वहां कैब सर्विस मुहैया करा रहा थे।

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परमिट स्थायी रूप से रद्द करने के अधिकार
नए नियम के तहत प्रादेशिक परिवहन कार्यालयों को पहली बार नियम का उल्लंघन करने पर ड्राइवरों के लाइसेंस को तीन महीने तक निलंबित करने और बार-बार उल्लंघन करने पर परमिट स्थायी रूप से रद्द करने के अधिकार दिए गए हैं। यह नियम चालकों के साथ-साथ परमिट धारकों और नए परमिट आवेदन/नवीनीकरण कराने वालों पर भी समान रूप से लागू होगा। मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में इस नियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है, जिससे चालकों के सामने जल्द से जल्द मराठी सीखने या फिर आजीविका गंवाने का दबाव बन गया है।

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ऐप बेस्ड कैब ड्राइवरों पर भी नियम लागू
'द इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, पब्लिक सर्विस गाड़ियां चलाने के लिए मंज़ूरी से जुड़े संशोधित नियम 4(4), परमिट से जुड़े नियम 78 और परमिट रिन्यूअल से जुड़े नियम 85 में अब जरूरी शर्तों में मराठी भाषा की जानकारी होना भी शामिल है। यह शर्त इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली गाड़ियां चलाने वाले ऐप-बेस्ड मोटर कैब ड्राइवरों पर भी लागू होती है। प्रावधान 22(3A) के तहत, जो ड्राइवर मराठी नहीं बोल पाएंगे, उनके ख़िलाफ नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई हो सकती है।

ड्राइवरों के लिए मराठी की ट्रेनिंग
इस बीच, महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ जैसे साहित्यिक संगठनों के सहयोग से यात्री वाहन ड्राइवरों के लिए मराठी ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू किया है। 105 दिन का यह प्रोग्राम रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस और भाषा ट्रेनिंग सेंटरों के ज़रिए चलाया जा रहा है, जिसका मकसद ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी में कामकाजी दक्षता हासिल करने में मदद करना है। विभाग के अनुसार, 1.10 लाख से ज़्यादा गैर-मराठी भाषी यात्री वाहन ड्राइवरों ने चार घंटे का ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरा कर लिया है। ड्राइवरों को 17 अगस्त को ठाणे में एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से सर्टिफिकेट मिलने हैं। उम्मीद है कि ट्रेनिंग की यह पहल ड्राइवरों को परिवहन विभाग द्वारा तय 15 अगस्त की समय सीमा से पहले भाषा संबंधी शर्त को पूरा करने में मदद करेगी।

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