ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका: चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सभी पदों से दिया इस्तीफा

कोलकाता
 चंद्रिमा भट्टाचार्य के तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष समेत सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने और विरोधी खेमे की ओर बढ़ने से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस पुराने मंत्रिमंडल का अध्याय लगभग समाप्त हो गया है, जिसने पिछले डेढ़ दशक तक सरकार और पार्टी संगठन, दोनों की कमान संभाली थी।

कभी ममता की सबसे भरोसेमंद टीम का हिस्सा रहे मंत्री या तो विरोधी खेमे में जा चुके हैं, पार्टी से दूरी बना चुके हैं अथवा राजनीतिक रूप से हाशिये पर हैं। चंद्रिमा का जाना ममता के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ममता के साथ अब केवल पूर्व मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय रह गए हैं। फिरहाद हकीम, अरूप बिश्वास अरूप राय व जावेद खान समेत अधिकांश पहले ही ममता का साथ छोड़ चुके हैं। ब्रात्य बसु और शशि पांजा फिलहाल चुप हैं।

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सूत्रों का कहना है कि ममता-चंद्रिमा के मजबूत रिश्ते में दरार गत 22 जून को पड़ी थी, जब न्यूटाउन के एक होटल में ऋतब्रत गुट की बैठक में चंद्रिमा के पुत्र सौरव बोस शामिल हुए थे। उस समय चंद्रिमा ने कहा था कि यह उनके बेटे का व्यक्तिगत निर्णय है।

चंद्रिमा 2009 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल में शामिल हुई थीं। उन्हें पहले महिला तृणमूल की जिम्मेदारी सौंपी गई। 2012 में वह विधि राज्य मंत्री बनीं और बाद में स्वास्थ्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाला। 2016 में उत्तर दमदम सीट से हारने के बाद ममता ने 2017 के उपचुनाव में उन्हें कांथी दक्षिण से लड़ाकर विधानसभा पहुंचाया। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य राज्य मंत्री के साथ-साथ ई-गवर्नेंस विभाग का स्वतंत्र प्रभार भी सौंपा गया।

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सत्ता गंवाने के बाद ममता ने चंद्रिमा को सुब्रत बक्सी की जगह तृणमूल का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। गत शुक्रवार को ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व में फिरहाद हाकिम, संदीपन साहा समेत कई नेता अस्थायी तृणमूल भवन पहुंचे और उसपर अपना नियंत्रण जताया। उस समय चंद्रिमा भी वहां मौजूद थीं, लेकिन कुछ देर बाद बिना किसी प्रतिरोध के वहां से चली गईं। इसके बाद ऋतब्रत गुट ने भवन पर ताला लगा दिया।

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सूत्रों के अनुसार, चंद्रिमा के बिना विरोध जताए कार्यालय छोड़ने से ममता बेहद नाराज हुईं। इस्तीफा देने के बाद चंद्रिमा ने बताया कि ममता ने फोन पर उनसे कहा, 'तुमने पूरा भवन ही उनके हवाले कर दिया।

चंद्रिमा का कहना है कि जब विश्वास ही समाप्त हो गया तो पद पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं था। इसके बाद उनका विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत के कक्ष में जाने ने नई अटकलों को जन्म दे दिया, हालांकि चंद्रिमा का कहना है कि उन्होंने अभी तक ऋतब्रत गुट की औपचारिक सदस्यता नहीं ली है और आगे का फैसला समय पर छोड़ दिया है।

 

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