एमपी के लग्जरी वृद्धाश्रम में बुजुर्ग नहीं आ रहे, रहने का किराया 80,000 रुपए तक

भोपाल

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ महीने पहले एक पेड वृद्धाश्रम की शुरुआत हुई थी। यह वृद्धाश्रम आधुनिक सुविधाओं से लैस था। उद्घाटन के इतने दिनों बाद भी इस वृद्धाश्रम में रहने वाला कोई नहीं है। सिर्फ दो बुजुर्गों को छोड़कर यह आधुनिक वृद्धाश्रम पूरी तरह से खाली है। ऐसे में इसकी व्यावहारिकता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

56 बुजुर्ग नागरिकों को रहने की है व्यवस्था
इस हाईटेक वृद्धाश्रम में 34 कमरे हैं। इन 34 कमरों में 56 बुजुर्ग नागरिक रह सकते हैं। कमरों के विकल्पों में सिंगल कमरों से लेकर सुइट तक शामिल हैं, जिन्हें बुजुर्गों को अलग-अलग स्तर पर आराम और प्राइवेसी देने के लिए डिजाइन किया गया है।

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पहले आओ, पहले पाओ की सुविधा
वहीं, इस वृद्धाश्रम में बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होती है। उद्घाटन के बाद से, दो कमरों को छोड़कर बाकी सभी कमरे खाली पड़े हैं। कमरे पूरी तरह से तैयार हैं लेकिन इन्हें लेने वाला कोई नहीं है।

जनवरी में हुआ था उद्घाटन
दरअसल, इसका उद्घाटन इसी साल जनवरी महीने में सीएम मोहन यादव ने किया था। इसके संचालन का जिम्मा एक एनजीओ के पास है। अपनी जरूरत के हिसाब से बुजुर्ग बुकिंग कर सकते हैं।

खर्च अधिक होने की वजह से खाली
पेड वृद्धाश्रम का कैंपस भोपाल के लिंक रोड पर नंबर 3 पर है। यह 5.25 एकड़ में फैला है। साथ ही इसमें काफी अत्याधुनिक सुविधाएं भी हैं। मगर रिस्पॉन्स कम होने की वजह यह है कि यह किसी बुजुर्ग को रखने का खर्च बहुत ज्यादा है। एक व्यक्ति के लिए हर महीने 45,000 रुपए से ज्यादा का खर्च आता है, जिसे कई लोग अपनी पहुंच से बाहर मानते हैं।

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24 करोड़ रुपए की लागत से हुआ था निर्माण
यहां रहने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने अब इस बुजुर्गों के आश्रय को अपने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जरिए चलाने का प्रस्ताव रखा है। इसी विभाग ने 24 करोड़ रुपए की लागत से इस विशाल वृद्धाश्रम का निर्माण करवाया था।

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सरकार इसे न लाभ, न हानि के आधार पर चलाने की योजना बना रही है, जिससे प्रति व्यक्ति रहने का खर्च कम हो जाएगा और ज्यादा से ज्यादा बुजुर्ग नागरिक इसकी ओर आकर्षित होंगे। एक अधिकारी, सामाजिक न्याय विभाग

अत्याधुनिक है वृद्धाश्रम
इस आश्रय गृह में एसी कमरे, इंटरटेनमेंट और आराम की जगहें, टहलने के लिए पक्का रास्ता, फिजियोथेरेपी सेंटर, लॉन्ड्री, किचन, मेडिकल रूम और रोजमर्रा की जरूरत की सारी चीजें हैं। साथ ही बुजुर्गों की देखभाल करने वाला स्टाफ भी उपलब्ध है।
मुनेश्वर कुमार

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