MP की डिजिटल विधानसभा: ई-ऑफिस से ई-विधान तक सबकुछ होगा ऑनलाइन

भोपाल
 मध्यप्रदेश की 16वीं विधानसभा का छठवां सत्र यानि मानसून सत्र की आहट आ रही है। मार्च के बाद अब जुलाई के आखिरी दिनों में शुरू होने के आसार नजर आ रहे हैं। इस बार विधानसभा में ई-विधान के जरिये पूरी कार्रवाई की जानी है, इसके लिए भी तैयारियां तेजी से चल रही हैं।

विधानसभा सचिवालय ने इस सत्र के लिए पूरी तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर तथा मुख्यमंत्री मोहन यादव के बीच चर्चा के बाद सत्र की अवधि और सत्र शुरू करने की तारीख पर निर्णय हो जाएगा।
सचिवालय खरीदेगा आल इन वन कम्प्यूटर

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ई-विधान को लेकर विधानसभा सचिवालय विभागीय तौर पर तेजी से काम कर रहा है। ई-विधान की तैयारियों के बीच विधानसभा सचिवालय द्वारा 35 आल इन वन कम्प्यूटर खरीदे जाने हैं। इस कंप्यूटर की खास बात यह होती है कि इसमें सीपीयू, मॉनिटर, बैटरी बैकअप, स्पीकर सभी एक साथ होते हैं। इसके लिए अलग से पार्ट्स नहीं खरीदने पड़ते।
ई-विधान को सभी राज्यों में बढ़ावा

भारत सरकार डिजिटल इंडिया की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसलिए ई-विधान को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसे NeVA (नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन) कहा जाता है। भारत सरकार मिशन मोड में इस परियोजना पर काम कर रही है। सभी राज्य विधान मंडलों को डिजिटल और कागज रहित बनाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। इसका टारगेट सभी राज्य विधान मंडलों को पेपरलेस करना, विधायी प्रक्रिया को ऑनलाइन करना है। जिसमें प्रश्न पूछना, विधेयक पेश करना और चर्चा करना शामिल है।
होंगे कई फायदे

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इसके अलावा विधायकों के बीच सूचना और दस्तावेजों का आदान-प्रदान भी इसी माध्यम से होगा। साथ ही सार्वजनिक पोर्टल पर विधायी सामग्री प्रकाशित करने, सदन की कार्रवाई को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड करने और सार्वजनिक करने की प्रक्रिया इसमें अपनाई जाएगी।
ई-ऑफिस सिस्टम कर रहा काम

गौरतलब है कि प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में ई-आफिस सिस्टम ने कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। ई-विधान सिस्टम लागू करने के साथ ही मानसून सत्र में भेजे जाने वाले जवाब भी ई-ऑफिस से भेजे जाएंगे। इसको लेकर विभाग प्रमुखों ने अधीनस्थ अफसरों और जिला अधिकारियों से कहा है कि विधानसभा के मानसून सत्र के प्रश्नोत्तर, ध्यानाकर्षण, याचिका आदि इसी माध्यम से ही भेजे जाएं। सरकार विधानसभा से संबंधित प्रक्रिया को भी ई-ऑफिस के दायरे में ला रही है। यानी इस बार का सत्र पूरी तरह डिजिटल हो सकता है।

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