स्वीडन-जर्मनी मॉडल पर बनेंगे ई-हाइवे, ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल एक्सप्रेस-वे पर सरकार का फोकस

सागर
देश में बिछाए जा रहे नेशनल हाइवे और एक्सप्रेस वे के जाल बाद अब सरकार ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे बनाने पर फोकस करेगी. सरकार आगामी बजट में नीतिगत बदलाव करते हुए ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे को प्राथमिकता देने जा रही है. चर्चा है कि आगामी बजट में इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे के लिए 5000 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान किया जा रहा है. इसके तहत दिल्ली जयपुर और दिल्ली मुंबई एक्स्प्रेस के विशेष सेक्शन का चयन करके पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे विकसित करने के लिए प्रोत्साहन देने की तैयारी है.

केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी पिछले दिनों इस बात के संकेत दे चुके हैं. इस प्रोजेक्ट के तहत स्वीडन और जर्मनी की तर्ज पर ओव्हरहैड केबल तकनीक और भारी वाहनों के लिए ओव्हरहैड इलेक्ट्रिक लाइन डाली जाएगी. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे को बढ़ावा देने के पीछे प्रदूषण कम करना और पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भरता कम करना है.

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क्या होता है इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे

इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे में ऐसे नेशनल हाइवे तैयार किए जाएंगे. जहां विशेष रूप से ई व्हीकल को चार्ज किया जा सकेगा. यहां पर केबल तकनीक के जरिए ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन बिछाकर भारी वाहनों की चार्जिंग सड़क पर हो सकेगी. इसके अलावा चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे, जहां छोटे ई व्हीकल चार्ज हो सकेंगे और बैटरी एक्सचेंज कर सकेंगे. ये हाइवे विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विकसित किए जाने की तैयारी है.

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इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे से देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण सुधार और ईधन की खपत कम होगी. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे से प्रदूषण की समस्या कम होगी. देश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर होगा और विदेश से कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी. इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों के उद्योग को पंख लगेंगे. सरकार देश के बडे़ शहरों के बीच के सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस प्रोजेक्ट पर फोकस कर रही है.

स्वीडन और जर्मनी की तर्ज पर विकसित होंगे इलेक्ट्रिक हाइवे

इसके लिए सरकार ने स्वीडन और जर्मनी में विकसित की गई इलेक्ट्रिक हाइवे तकनीक को आधार बनाए गया है. इस तकनीक के तहत हाइवे पर ओव्हरहैड इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने का काम किया जाएगा. हर 40-50 किमी पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. बड़े और भारी वाहन सड़क पर ही ओव्हरहैड केबल के जरिए चार्ज हो सकेंगे. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे पर ग्रीन एनर्जी से चलने वाले चार्जिंग स्टेशन विकसित होंगे.

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2030 तक पायलट प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य है

इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस वे और दिल्ली जयपुर नेशनल हाइवे पर चुनिंदा सेक्शन में ये विकसित किए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य नेशनल हाइवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग के ढांचे को मजबूत करना है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भारत का ऐसा इलेक्ट्रिक हाइवे होगा, जो दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक हाईवे बन सकता है.

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