90 डिग्री ओवरब्रिज सुधारने उतरे IIT भुवनेश्वर के एक्सपर्ट, अब बाकी पुलों पर उठे सवाल

भोपाल

मध्य प्रदेश में रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) और फ्लाईओवर के निर्माण में सामने आ रही तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए पीडब्ल्यूडी अब देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों की मदद ले रहा है. विभाग ने राज्य के कई बड़े प्रोजेक्ट्स की डिजाइन और तकनीकी जांच के लिए अलग-अलग आईआईटी के साथ अनुबंध किया है. अब तक आईआईटी दिल्ली, मुंबई, भुवनेश्वर और इंदौर को इस काम में शामिल किया जा चुका है। 

भोपाल के ऐशबाग रेलवे ओवर ब्रिज का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. इस ब्रिज के डिजाइन में 90 डिग्री का मोड़ होने के कारण इसकी काफी आलोचना हुई थी. अब इस बिगड़े हुए डिजाइन को सुधारने की जिम्मेदारी आईआईटी भुवनेश्वर को सौंपी गई है. पीडब्ल्यूडी इस ब्रिज की नई डिजाइन तैयार करवा रहा है ताकि भविष्य में लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। 

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एलीवेटेड कॉरिडोर का सर्वे
आईआईटी दिल्ली को रीवा और जबलपुर के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी दी गई है. दिल्ली आईआईटी विशेषज्ञों की टीम रीवा के एक प्रोजेक्ट और जबलपुर के एलीवेटेड कॉरिडोर का सर्वे कर रही है. इन तीनों परियोजनाओं की लागत करीब 500 करोड़ रुपए बताई जा रही है. इन प्रोजेक्ट्स का पहला सर्वे पूरा हो चुका है और तकनीकी सुधारों पर काम जारी है। 

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इटारसी के सांवलखेड़ा में बन रहे रेलवे ओवर ब्रिज में भी कुछ तकनीकी खामियां सामने आई थीं. इस परियोजना में आईआईटी मुंबई, आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों के साथ मिलकर समाधान पर काम कर रहा है. एक्सपर्ट ब्रिज की डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं। 

कई गंभीर तकनीकी समस्याएं
इसी तरह इंदौर में एलआईजी चौराहे से नवलखा तक बनने वाले 6.2 किलोमीटर लंबे एलीवेटेड कॉरिडोर में भी कई गंभीर तकनीकी समस्याएं मिली थीं. इस परियोजना की जांच और सुधार का काम आईआईटी इंदौर को दिया गया है। 

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पीडब्ल्यूडी का मानना है कि आईआईटी जैसे बड़े तकनीकी संस्थानों की मदद से ब्रिज और फ्लाईओवर की गुणवत्ता बेहतर होगी और भविष्य में डिजाइन संबंधी गलतियों को रोका जा सकेगा। 

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