इंदौर में 48 घंटे में 4 छात्रों ने की आत्महत्या, हर साल बढ़ रहे केस… ‘सुसाइड कैपिटल’ बनता जा रहा ?

इंदौर

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में आत्महत्या के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. यहां महज 48 घंटे में 4 छात्रों ने आत्महत्या कर ली है. इनमें से 3 नर्सिंग और विज्ञान के छात्र हैं और एक लॉ का स्टूडेंट है. सभी मृतक अन्य शहरों और कस्बों से पढ़ाई के लिए इंदौर आए थे. दरअसल, इंदौर की पवन पुरी कॉलोनी में लॉ की तैयारी कर रहे 21 साल के छात्र बलिराम ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. खरगोन का रहने वाला बलिराम यहां दोस्त के साथ किराये का रूम लेकर रहता था.

दूसरी तरफ होल्कर साइंस कॉलेज से बीएससी कर रहे लक्की ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. लक्की मूल रूप से अलीराजपुर का रहने वाला था. रविवार-सोमवार दरमियानी रात संयोगितागंज इलाके में नर्स यसमित्रा ने आत्महत्या कर ली जो एक निजी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई भी कर रही थी. सबसे ज्यादा हैरान नर्स आशा कानूनगो की आत्महत्या ने किया जो मूल रूप से सिवनी की रहने वाली थी.

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रविवार को ही आशा ने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. जब उसका रूम खोला गया तो वहां दीवारों पर ढेर सारे कागज चिपके थे जिसमें वो मोटिवेशनल कोट्स लिखती थी. आत्महत्या से पहले उसने अपनी बहन से फोन पर बात भी की थी. दीवारों पर लिखे कागज़ों में जो बातें लिखी थीं, उससे यही प्रतीत हो रहा है कि आशा पढ़ाई को लेकर बेहद तनाव में थी. पुलिस के मुताबिक चारों आत्महत्याएं डिप्रेशन और पढ़ाई में तनाव की वजह से हुई है. सभी को यह डर सता रहा था कि पढ़ाई की इस दौड़ में वो पीछे रह गए हैं.

हर साल बढ़ रहे हैं इंदौर में सुसाइड केसे

एनसीआरबी के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाएंगे कि इंदौर में आत्महत्या के मामले साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं. इंदौर में साल 2019 में 618 लोगों ने आत्महत्या की. ये आंकड़ा 2020 में बढ़कर 644 तक पहुंच गया. साल 2021 में 737 लोगों ने आत्महत्या की तो वहीं 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 746 आत्महत्या तक पहुंच गया.

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इंदौर में आत्महत्या के मामलों में इतनी वृद्धि क्यों हुई?

एमपी के मशहूर मनोचिकित्सक, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी ने इंदौर में बढ़ते आत्महत्या के मामलों पर आजतक से बात की. डॉक्टर त्रिवेदी एमपी सुसाइड प्रिवेंशन टास्क फोर्स के सदस्य भी है. उन्होंने बताया, 'इंदौर मध्य भारत के सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से एक है, जिसमें आईआईटी और आईआईएम जैसे कई प्रीमियम शैक्षणिक संस्थान और प्रसिद्ध कोचिंग सेंटर हैं. इसके अलावा इंदौर में कई अन्य निजी कॉलेज भी स्थित हैं. इस वजह से कई छात्र पढ़ाई के मामले में बेहतर भविष्य का सपना लेकर इंदौर आते हैं, लेकिन हाल ही में सामने आए इन 4 आत्महत्या मामलों की तरह, इंदौर में आत्महत्याओं का एक बड़ा कारण पढ़ाई और परीक्षा का दबाव है."

उन्होंने आगे कहा कि माता-पिता की उम्मीदों पर खरा न उतरने के बाद खुद को संभालना और एक छोटे शहर या गांव से इंदौर जैसे बड़े शहर में आने वाले छात्र की स्थिति ऐसी होती है कि वे खुद को दूसरे छात्रों के साथ बराबरी बनाए रखने में विफल पाते हैं और इसलिए कभी-कभी वे यह घातक कदम उठा लेते हैं. पढ़ाई से जुड़ा तनाव हो या सबंधों से जुड़ा तनाव, परीक्षा में उम्मीद मुताबिक नंबर नहीं आने की निराशा या एकाग्रता की कमी, आजकल के छात्र इन चीज़ों से बहुत जल्दी घबरा जाते हैं.

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युवा प्रोफेशनल्स भी बन रहे शिकार

आत्महत्या अब केवल छात्रों के बारे में नहीं है, एक बढ़ते आईटी हब होने के नाते, इंदौर में कई आईटी कंपनियां भी हैं. निजी क्षेत्र में नौकरी की असुरक्षा भी आत्महत्या के बढ़ते जोखिम का एक बड़ा कारण है. तनावपूर्ण नौकरी, लक्ष्य पूरा न करना, कम छुट्टियाँ और परिवार के साथ बिताने के लिए कम समय कुछ ऐसे कारण हैं जो हमने मेट्रो शहरों या इंदौर जैसे किसी अन्य बड़े शहर में आत्महत्या की वजहों में देखे हैं.

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