भारत एआई के खिलाफ नहीं, पर एनिमेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बनाया ‘क्रिएटिव इंडिया मिशन’: आशीष कुलकर्णी

धनबाद  (झारखंड)
वर्तमान में भारत सहित पूरे विश्व में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की एक नई लहर चल रही है। एआई की मदद से क्रिएटर्स न केवल अपना काम तेजी से निपटा रहे हैं, बल्कि नया कंटेंट भी तैयार कर रहे हैं। लेकिन एआई के इस दौर में एनिमेशन इंडस्ट्री का क्या महत्व है और इसका भविष्य किस दिशा में जा रहा है?

​इन तमाम सवालों पर बॉलीवुड एनिमेशन इंडस्ट्री के दिग्गजों में शामिल आशीष कुलकर्णी (संस्थापक व निदेशक — इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज एवं संस्थापक — पुन्नर्युग  आर्टविज़न   प्राइवेट लिमिटेड ) ने विस्तार से अपनी बात रखी। देश में वर्ल्ड क्लास एनिमेशन स्टूडियो स्थापित करने वाले आशीष कुलकर्णी ने एआई, एनिमेशन के भविष्य और भारत सरकार की नीतियों पर खुलकर चर्चा की।

ए​आई के मुख्य बिंदु और उद्योग पर आशीष कुलकर्णी के विचार
​एआई को हावी न होने दें, उसे प्रोडक्शन प्रोसेस का हिस्सा बनाएं
एआई के विकास के साथ अपार चुनौतियाँ और अवसर दोनों हैं। एआई से कंटेंट जल्दी और अच्छी क्वालिटी का बन सकता है, लेकिन हमें इसे अपने प्रोडक्शन प्रोसेस में एकीकृत (इंटीग्रेट) करना होगा। एआई हमारे ऊपर हावी न हो, बल्कि हम एआई को एक ‘कर्मचारी’ की तरह इस्तेमाल करें।

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​बुनियादी कौशल  का कोई विकल्प नहीं
अकादमिक पाठ्यक्रमों में एआई को शामिल करने पर कुलकर्णी ने स्पष्ट किया कि स्टोरी टेलिंग और फिल्म मेकिंग का व्याकरण हमारी बुनियादी क्षमता (फाउंडेशन स्किल्स) है। एआई को एक ‘एप्लीकेशन’ के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए, न कि मुख्य पाठ्यक्रम के रूप में। यदि व्यक्ति का बुनियादी कौशल मजबूत नहीं होगा और एआई कोई गलती करेगा, तो इंसान भी वही गलती दोहराएगा। सही और गलत सामग्री की पहचान के लिए बेसिक स्किल्स अनिवार्य हैं।

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​हम एआई के खिलाफ नहीं, दुनिया से पीछे नहीं छूट सकते
तकनीक के बदलाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "हम एआई के खिलाफ नहीं हैं। हर नई तकनीक एक नया स्वरूप लेकर आती है। हम इससे मुंह नहीं मोड़ सकते, वरना दुनिया से पीछे छूट जाएंगे। हालांकि, हमें तकनीक को खुद पर हावी भी नहीं होने देना है।"

​एनिमेशन सालों-साल अमर रहता है
एनिमेशन कंटेंट के टिकाऊपन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने 'टॉम एंड जेरी' (1960) और अपने द्वारा निर्मित 'लिटिल कृष्णा' (2007-08) का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि एनिमेशन सामग्री सिर्फ बच्चों के लिए नहीं बल्कि हर वर्ग के लिए होती है और यह अगले 50 से 100 सालों तक प्रासंगिक बनी रहती है।

​बिना विजुअल इफेक्ट्स  के आधुनिक फिल्में अधूरी
फिल्म उद्योग में एनिमेशन और विजुअल इफेक्ट्स के महत्व पर उन्होंने कहा कि आज कोई भी फिल्म विजुअल इफेक्ट्स के बिना पूरी नहीं हो सकती। चाहे फीचर फिल्म हो, डॉक्यूमेंट्री हो या विज्ञापन—हर जगह विजुअल इफेक्ट्स की आवश्यकता होती है।

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​भारत सरकार का 'क्रिएटिव इंडिया मिशन' और युवाओं का भविष्य
​एनिमेशन को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों पर कुलकर्णी ने बताया कि भारत सरकार ने 'क्रिएटिव इंडिया मिशन' की शुरुआत की है।

​18 राज्यों में लागू होगी एनिमेशन-गेमिंग पॉलिसी: अब तक 11 राज्यों में एनिमेशन और गेमिंग पॉलिसी बनाई जा चुकी है और जल्द ही 7 अन्य राज्यों को जोड़कर इस साल के अंत तक 18 राज्यों में यह पॉलिसी लागू हो जाएगी।

​करियर और रोजगार की सुरक्षा: राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर बन रही इन नीतियों से युवा क्रिएटर्स को करियर के नए अवसर मिलेंगे। आने वाले समय में इस क्षेत्र में युवाओं के लिए नौकरियां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।

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